NHRC ने पूछा- राजस्थान में क्यों बिक रहीं बेटियां: 15 दिन में भास्कर की 2 खबरों पर केंद्र और 7 राज्य सरकारों को नोटिस



जयपुरएक घंटा पहले

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दैनिक भास्कर की खबर ‘स्टांप पर बेची जा रहीं बेटियां’ पर संज्ञान लेते हुए एक्शन लिया है। आयोग ने राजस्थान सरकार से पूरे मामले में 4 हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके अलावा, आयोग के विशेष प्रतिनिधि उमेश कुमार शर्मा को भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके तीन महीने में जानकारी देने को कहा गया है। उधर, राजस्थान बाल संरक्षण आयोग भी हरकत में आया है। आयोग ने जयपुर में शुक्रवार को बैठक बुलाई है।

पिछले 15 दिन में प्रकाशित भास्कर की 2 खबरों को आयोग ने गंभीरता से लिया है। बेटियां बेचने वाली खबर पर जहां राजस्थान सरकार को नोटिस दिया गया, वहीं इससे पहले दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज पंथ के तहत देवदासी प्रथा खबर पर केंद्र सरकार के साथ ही कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार से इन पॉइंट्स पर मांगे हैं जवाब

  • दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पर NHRC ने कहा है कि 6 जिलों में स्टांप पेपर पर बेटियों को बेचा जाता है। ऐसा नहीं करने पर उनकी माओं के साथ रेप किया जाता है। इन बच्चियों को खरीदकर UP, MP, दिल्ली सहित विदेशों में भेजा जाता है।
  • NHRC ने इस घिनौने कृत्य को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया है। इस मामले में राजस्थान की मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर डिटेल रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पूछा है कि इस मामले में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं? इसे रोकने के लिए क्या करेंगे?
  • रिपोर्ट में यह भी शामिल होना चाहिए कि राज्य सरकार कैसे संवैधानिक प्रावधानों या पंचायती राज कानून के अनुसार ग्राम पंचायत के कार्यों को सुनिश्चित कर रही है, ताकि राज्य में लड़कियों और महिलाओं के मानवाधिकारों और गरिमा के अधिकार को प्रभावित करने वाली जाति आधारित व्यवस्था को समाप्त किया जा सके।
  • राजस्थान के DGP को भी नोटिस जारी करते हुए कहा गया है कि इस अपराध के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जा रही है? आयोग ने सख्ती से पूछा है कि ऐसे मामलों में अब तक कितनी FIR दर्ज हुई हैं और कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल कई गई है। साथ ही, ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम रहे अफसरों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया है। NHRC ने चार हफ्ते में DGP से रिपोर्ट मांगी है।
  • 26 अक्टूबर 2022 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में जाति पंचायतें सीरिया और इराक की तरह इस अपराध को अंजाम दे रही हैं, जहां लड़कियों को गुलाम बनाया जाता है। कथित रूप से, भीलवाड़ा में, जब भी दो पक्षों के बीच कोई विवाद होता है, तो पुलिस के पास जाने के बजाय, इसके निपटारे के लिए जाति पंचायतों से संपर्क करते हैं। यहां बच्चियों की माताओं से रेप करने का आदेश दिया जाता है। आयोग ने DGP, मुख्य सचिव और राज्य सरकार को दिए नोटिस में भास्कर सीरीज की तीनों खबरों के लिंक भी अटैच किए हैं।

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने बुलाई फुल कमीशन मीटिंग
भास्कर की खबर पर राजस्थान बाल संरक्षण आयोग ने भी शुक्रवार को फुल कमीशन की मीटिंग बुलाई है। आयोग के सदस्य शिव भगवान नागा ने बताया कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। क्या एक्शन लिया जाए, इसके लिए प्रभावित जिलों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उसके बाद कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।

मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी नोटिस।

मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी नोटिस।

सर्वे एजेंट बनकर पहुंची थी भास्कर टीम
भास्कर टीम इस खुलासे के लिए जयपुर से करीब 340 किलोमीटर का सफर करके भीलवाड़ा के पंडेर गांव पहुंची थी। यहां कई बस्तियों में गरीब परिवारों की लड़कियों को दलाल स्टांप पेपर पर खरीदकर बेच देते हैं। टीम ने बस्तियों में जाकर लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन दलालों के डर से कोई तैयार नहीं हुआ। इसके बाद हम गांव में पानी की समस्या को हल करने के लिए सर्वे वाले बनकर गए।

लोगों ने हमें अपनी समस्याएं बताईं। कुछ लोगों को विश्वास में लेकर हमने लड़कियों की खरीद-फरोख्त के बारे में पूछताछ की। इलाके के लोगों ने जो कुछ बताया, वो हैरान करने वाला था। इस पर भास्कर ने स्पेशल सीरीज के जरिए तीन दिन लगातार तीन खबरों से इस घिनौने खेल का खुलासा किया था।

25 अक्टूबर: स्टांप पेपर पर लड़कियों को बेचने का खुलासा

भास्कर ने 25 अक्टूबर को ‘लड़कियों की खुलेआम नीलामी; जितनी खूबसूरत, उतनी ऊंची बोली: स्टाम्प पर लिखते हैं गोद ले रहे, 12 साल की बच्ची को 3 बार बेचा, 4 अबॉर्शन ‘ शीषर्क से खबर प्रकाशित कर राजस्थान के पांच जिलों में स्टांप पेपर पर लड़कियों को बेचने का खुलासा किया था। भीलवाड़ा की बस्तियों में 2 पक्षों के बीच कोई विवाद या झगड़ा होने पर जातीय पंचायत उन पर जुर्माना लगा देती है। कर्जा चुकाने के लिए गरीब परिवारों को लड़कियों को बेचने के लिए मजबूर किया जाता है। फिर दलाल लड़कियों का सौदा स्टांप पेपर पर करते हैं। लड़कियों को देशभर के विभिन्न बड़े शहरों में बेचा जाता है। खबर में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया। इसमें पीड़ित लड़कियों की दर्द भरी कहानियों से रूबरू करवाया गया। पूरी खबर पढ़ें

26 अक्टूबर: लड़कियों को बेचने वाले दलालों का खुलासा

भास्कर ने 26 अक्टूबर को दूसरी खबर ‘बच्चियों को जल्दी जवान करने के लिए इंजेक्शन: स्टाइलिश कपड़े, इंग्लिश बोलने की ट्रेनिंग; कई दिन भूखा भी रखते हैं’ शीर्षक से प्रकाशित किया। इसमें लड़कियों को बेचने वाले दलालों का खुलासा किया था। इसमें बताया गया कि कैसे दलाल 4 जिलों से लड़कियों को स्टांप पेपर पर खरीद कर देशभर में भेज रहे हैं। हर गांव में दलाल एक्टिव होते हैं। यहां उम्र के हिसाब से लड़कियों की कीमत तय होती है।

खरीदने के बाद तब तक भूखा रखा जाता है, जब तक की लड़की दलाल का हर हुक्म मानने के लिए राजी न हो जाए। लड़कियों को ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं। ताकि उनके शरीर जल्दी विकसित हो जाएं। पुलिस की रेड में इन लड़कियों को पकड़ लिया जाता है तो दलाल चालाकी से उनके परिजन बनकर वापस ले जाते हैं। इसके लिए वे लड़कियों के फर्जी आधार कार्ड बनवाते हैं। पूरी खबर पढ़ें

27 अक्टूबर: लड़कियों के ब्रेनवॉश का खुलासा

भास्कर ने 27 अक्टूबर को तीसरी खबर ‘ऐसा ब्रेनवॉश, मां-बाप तो दूर अपना नाम याद नहीं: आजाद होने के बाद भी बेटियां नर्क में’ शीर्षक से प्रकाशित किया। इसमें खुलासा किया गया कि कैसे खेलने-कूदने की उम्र में लड़कियां गुलाम बनाई गईं। कैसे उनका ब्रेनवॉश किया गया। ब्रेनवॉश के बाद लड़कियां अपने मां-बाप के साथ खुद के नाम तक भूल जाती हैं। फिर लड़कियों को नई पहचान देने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनवाते हैं। दलाल खुद ही इनके मां-बाप बन जाते हैं।

लड़कियों को सिखाया जाता है कि पुलिस में पकड़े जाने पर भी उन्हें ही मां-बाप बताएं। पुलिस के रेस्क्यू के बाद इन लड़कियों की काउंसिलिंग करने में तीन से चार महीने लगते हैं। इसके बाद भी वे अपने मां-बाप के नाम याद नहीं कर पाती हैं। पूरी खबर पढ़ें

NHRC ने केंद्र और 6 राज्यों को नोटिस जारी किया
इससे पहले, NHRC ने भास्कर की खबर पर संज्ञान लेते हुए दक्षिण भारत के 6 राज्यों समेत केंद्र सरकार के दो मंत्रालयों को नोटिस भेजा था। इन राज्यों में कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र शामिल हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालयों को भी ये नोटिस भेजे गए हैं।

भास्कर ने यह खबर पंथ सीरीज के तहत बीते शुक्रवार को हेडलाइन ‘देवता से शादी कराकर यौन शोषण- प्रेग्नेंट होते ही छोड़ देते हैं, भीख मांगने को मजबूर खास मंदिरों की देवदासियां’ के साथ पब्लिश की थी।

NHRC के डिप्टी डायरेक्टर (मीडिया एंड कम्युनिकेशन) जेमिनी श्रीवास्तव ने भास्कर से बात करते हुए कहा कि भास्कर की खबर से हमें पता लगा कि देवदासियां किस स्थिति में हैं। आपने कमजोर और पिछड़े तबके की आवाज उठाई और सच को सामने लेकर आए। भास्कर जैसे जिम्मेदार संस्थान से ही ऐसी उम्मीद की जा सकती है। हमने आपकी खबर को आधार बनाकर 6 राज्यों को नोटिस भेजा है। इन राज्यों को 6 हफ्तों के भीतर जवाब देना है। उसके बाद मामला कोर्ट में लेकर जाएंगे।’ पूरी खबर पढ़िए

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