MLA ने किया स्कूलों के विलय की योजना का विरोध: सीएम और शिक्षा मंत्री को लिखा लेटर, नामांकन बढ़ाने की होनी चाहिए कोशिश



टोंक29 मिनट पहले

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हरीश चंद्र मीना ने मुख्यमंत्री से पिछली सरकार के समय विलय किए गए सभी सरकारी स्कूलों को फिर से शुरू करवाने की अपील की है।

प्रदेश सरकार ने 25 से कम स्टूडेंट के नामांकन वाली स्कूलों को बंद करने का प्लान बना चुकी है। इसके लिए हर जिले से ऐसे स्कूलों की लिस्ट मंगवाई जा रही है। प्रदेशभर में करीब 10 हजार 584 स्कूल है, जिसमें 25 से कम बच्चों का नामांकन है। टोंक जिले में करीब 347 स्कूलों में नामांकन कम है। उनियारा विधायक हरीश चन्द्र मीना अपनी ही सरकार की इस योजना के विरोध में उतर गए हैं।

हरीश मीना ने 25 से कम नामांकन वाले स्कूलों को बंद करने के प्लान पर एतराज जताया और मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से इसको तुरंत निरस्त करने की मांग करते हुए पत्र लिखा है। मीना ने लेटर में लिखा कि कम नामांकन वाले स्कूलों बंद करने के बजाय इनमें नामांकन बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए। मीणा ने कहा कि सरकार इस प्लान को निरस्त नहीं करती है तो विधानसभा सत्र में इसका विरोध करेंगे।

MLA हरीश चन्द्र मीना ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को पत्र में लिखा कि शिक्षा विभाग ने देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के 97 स्कूलों समेत प्रदेशभर में कम नामांकन वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को बंद कर अन्य स्कूलों में विलय करने की योजना बनाई है। पिछली बीजेपी सरकार ने भी एकीकरण के नाम पर हजारों की संख्या में सरकारी स्कूलों का विलय किया था, जो प्रदेश के गांवों और बस्तियों में थे और इनमें सर्व समाज के गरीब वर्गों के बच्चे पढ़ाई करते थे। उस समय स्कूलें बंद होने से गरीब बच्चों का परेशानी का सामना करना पड़ा था और प्रदेश में शिक्षण व्यवस्था भी बहुत प्रभावित हुई थी।

विधायक ने कहा कि वर्तमान सरकार ने विलय किए गए कुछ स्कूलों को दोबारा शुरू भी किया है, लेकिन अधिकतर स्कूल अभी तक बंद ही है। अब एक बार फिर शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 10 हजार 584 स्कूलों को विलय करने की तैयारी कर रहा है, जिससे गांव, ढाणी के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएगे। उन्होंने बताया कि स्कूलों मे कम बच्चे शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की अकर्मण्यता को दर्शाता है। स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के प्रयास करने के बजाय इन स्कूलों को ही बंद करने की योजना समझ से बिल्कुल परे हैं। इससे समाज के गरीब वर्ग के बच्चों के हितों के साथ अन्याय होगा।

हरीश मीना ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इस मामले पर गंभीरता पूर्वक संज्ञान लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से इस प्रकार की योजना को निरस्त करने के लिए आदेश देना चाहिए। अगर इसके बाद भी इस योजना को निरस्त नहीं किया जाता है, तो आगामी विधानसभा सत्र में स्कूलों को विलय करने की योजना का विरोध किया जाएगा। इसके अलावा विधायक ने मुख्यमंत्री से पूर्ववर्ती सरकार की ओर से प्रदेश में विलय किए गए सभी सरकारी स्कूलों को फिर से शुरू करवाने का आग्रह किया है।

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