MBA पास कर बिजनेस किया, फिर सरपंच बनी थीं प्रीति: अजमेर मेयो कॉलेज में पढ़ीं, हॉर्स राइंडिग, फोटोग्राफी की शौकीन थीं



कोटा42 मिनट पहले

MBA युवा सरपंच प्रीति झाला की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद परिवार सदमे में है। प्रीति झाला बचपन से ही फ्रेंडली नेचर की थीं। लोगों की भलाई के बारे में सोचती थीं। छोटे भाई करणी सिंह ने बताया कि एक बार बहन के साथ गांव गया था। गांव में महिलाएं सिर पर मटकी रखकर पानी ला रही थीं।

प्रीति ने ये देखकर कहा कि गांव में आज भी महिला दूर-दूर से मटकियों में पानी भरकर लाती हैं। मुझे इन महिलाओं के लिए कुछ करना है। इसके बाद वह महिलाओं की भलाई के काम में जुट गईं। पंचायत चुनाव से पहले प्रीति ने अपने पिता के साथ 1 महीने गांव में कैंपेनिंग की। इस मेहनत का उसे फल मिला और सारोला ग्राम पंचायत की सरपंच बनी।

प्रीति झाला (बाएं से दूसरी)

मेयो कॉलेज में पढ़ी, हॉर्स राईडिंग में मेडल जीत

सिंह ने बताया कि प्रीति ने दसवीं तक कोटा में पढ़ाई की। उसके बाद मेयो कॉलेज अजमेर में 2008 तक पढ़ाई की। प्रीति को घुड़सवारी का शौक था। उसने पढ़ाई के दौरान हॉर्स राइडिंग में मेडल जीते। जब भी समय मिलता वह हॉर्स राइडिंग करती थीं। प्रीति के पास दो घोड़े हैं। हॉर्स राइडिंग के साथ साथ उन्हें फोटोग्राफी का भी शौक था।

MBA के बाद बिजनेस किया, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आई

करणी सिंह ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रीति कोटा आ गईं। उन्होंने 2017 में कोटा डोरिया का बिजनेस शुरू किया। विदेशों में कोटा डोरिया की साड़ी एक्सपोर्ट की। 3-4 साल तक बिजनेस को आगे बढ़ाया। लोगों की सेवा करने का विचार उसे राजनीति में खींच लाया। साल 2019 में पंचायत चुनाव में सारोला ग्राम पंचायत की सीट जनरल महिला के लिए आरक्षित हुई तो प्रीति ने चुनाव लड़ा। बिजनेस भी साथ-साथ चल रहा था।

1 महीने के कैंपेनिंग में प्रीति ने सरपंच का चुनाव जीता।

1 महीने के कैंपेनिंग में प्रीति ने सरपंच का चुनाव जीता।

पिता ने आगे बढ़ाया

प्रीति के पिता कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। कोऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष रहे। प्रीति के लोगों के लिए कुछ करने की जुनून को अच्छी तरफ समझते व जानते थे। पिता रणवीर सिंह झाला ने बेटी को सपोर्ट किया। चुनाव से पहले वो रोज उसे साथ लेकर गांव में जाते थे। लोगों से मीटिंग करवाते। 1 महीने के कैंपेनिंग में प्रीति ने सरपंच का चुनाव जीता। रणवीर झाला के परिवार में पहली बार कोई सरपंच बना।

जब भी गांव जाती तो बच्चों के लिए टॉफियां लेकर जाती थीं।

जब भी गांव जाती तो बच्चों के लिए टॉफियां लेकर जाती थीं।

सरपंच बनते ही पेयजल व्यवस्था की

सारोला ग्राम पंचायत के उप सरपंच जितेंद ने बताया कि ग्राम पंचायत में 5 गांव आते हैं। इनमें सारोला, दरबिची,डाबर, मोतीकुआं व कचनावदा में पीने के पानी की समस्या थी। सरपंच बनते ही प्रीति ने पीने के पानी की समस्या का समाधान किया। करीब 6 करोड़ 38 लाख की लागत से पेयजल योजना स्वीकृत करवाई। डाबर व दरबिची के बीच लिंक रोड़ खराब था। करीब 2.5 किमी लिंक रोड़ स्वीकृत करवाया। दरबिची में आगनबाड़ी केंद्र की छत से पानी टपकता था। प्रीति ने सरकारी स्कूल में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण करवाया।

सुल्तानपुर पंचायत की 33 ग्राम पंचायतों में प्रीति सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी थीं।

सुल्तानपुर पंचायत की 33 ग्राम पंचायतों में प्रीति सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी थीं।

बच्चे टॉफी मांगते

प्रीति को बच्चो से बहुत लगाव था। जब भी गांव जाती तो बच्चों के लिए टॉफियां लेकर जाती थीं। कभी कभी टॉफी ले जाना भूल जातीं तो गांव में ही दुकान से खरीद कर बच्चों को बांटतीं। बच्चे भी उसे देखते ही टॉफी मांगते।

हॉर्स राइडिंग के साथ साथ उसे फोटोग्राफी का भी शौक था।

हॉर्स राइडिंग के साथ साथ उसे फोटोग्राफी का भी शौक था।

33 ग्राम पंचायत सरपंच में सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी थीं

सामाजिक कार्यकर्ता कुंदन चीता ने बताया कि उसके परिवार पहली बार कोई सरपंच बना था। सुल्तानपुर पंचायत की 33 ग्राम पंचायतों में प्रीति सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी थीं। जनसुनवाई में खुलकर अपनी बात रखती थीं। लोगों की समस्याओं पर स्टैंड लेती थीं। उसे गलती बर्दाश्त नहीं होती थी। कृषि कानून के खिलाफ चले आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। वह राजपूज समाज की उभरती महिला नेत्री थीं।

जमीन से जुड़े होने के कारण वो सबकी चहेती थीं।

जमीन से जुड़े होने के कारण वो सबकी चहेती थीं।

आबादी क्षेत्र में पट्टे बनवाए

उप सरपंच जितेंद ने बताया कि सरपंच बनने के बाद प्रीति ने अपनी ग्राम पंचायत में कई विकास कार्य करवाए। बिजली सड़क पानी के अलावा आबादी क्षेत्र में हर घर के पट्टे बनवाए। वो पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी थी। पक्षियों के लिए परिंडे बांधना व पक्षी बचाओ अभियान चलाए। कोरोना काल में लॉक डाउन के समय ग्राम पंचायत में रहकर बाहर से आकर रहने वाले मजदूरों की खाने पीने की व्यवस्था करवाई। जमीन से जुड़े होने के कारण वो सबकी चहेती थीं। वो समाज के लिए कुछ करना चाहती थीं, लेकिन सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई।

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पिता चला रहे थे जीप, पहिए के नीचे आई सरपंच: आगे चल रही कार को बचाने के चक्कर में डिवाइडर पर चढ़ी गाड़ी

सड़क हादसे में युवा महिला सरपंच की मौत हो गई। वह ठिकानेदार की बेटी थीं। पिता जीप में बैठाकर उनको रोज ग्राम पंचायत ले जाया करते थे। करीब 40 किलोमीटर की दूरी बेटी-पिता साथ में तय करते थे। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। पिता जीप चला रहे थे। कोटा से करीब 10 किलोमीटर आगे आने पर जीप बेकाबू हो गई। बेटी जीप के अगले पहिए के नीचे आ गई। महिला सरपंच को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पिता मामूली रूप से घायल हुए। (पढ़ें पूरी खबर)

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