2 मंजिला मकान के बराबर शिवजी की एक आंख: 72 फीट का सीना, 250 टुकड़ों से बना 191 फीट का त्रिशूल



जयपुर39 मिनट पहलेलेखक: जयदीप पुरोहित

नाथद्वारा में बनी विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा की चर्चा विश्वभर में हो रही है। इसे विश्वास स्वरूपम यानी स्टैच्यू ऑफ बिलीफ नाम दिया गया। जिस तरह से इस खूबसूरत प्रतिमा को बनाया गया है, उसके पीछे की कहानी भी काफी रोचक है।

प्रतिमा आर्ट और टेक्नोलॉजी का जोड़कर तैयार की गई है। प्रतिमा कितनी विशाल है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक आंख 19 फीट की है, यानी 2 मंजिला मकान जितनी ऊंची।

इसके अधिकांश हिस्से गुरुग्राम के स्टूडियो में तैयार किए गए हैं। भगवान शिव का त्रिशूल भी छोटे-छोटे 250 स्ट्रक्चर को जोड़ बनाया गया।

अब तक आपने पढ़ा या देखा होगा कि आखिर यह प्रतिमा दिखती कैसी और इसे बनाने में कितने साल लगे।

लेकिन, दैनिक भास्कर ऐप पर पहली बार देखिए, इस प्रतिमा को बनाने की कहानी के साथ 19 सेकेंड का वीडियो… कैसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा को ढाला गया? 25 फोटो बताएंगे प्रतिमा के 10 साल में तैयार होने की कहानी…।

प्रतिमा का बेस 30 गुणा 25 मीटर का है और 10 फीट का हिस्सा जमीन के अंदर है।

इसे कोर वॉल तकनीक से बनाया गया है, 250 साल तक बिना मेंटेनेंस के भी इसमें जंग तक नहीं लगेगी।

इसे कोर वॉल तकनीक से बनाया गया है, 250 साल तक बिना मेंटेनेंस के भी इसमें जंग तक नहीं लगेगी।

प्रतिमा में 26618 क्यूबिक मीटर सीमेंट-कंक्रीट लगा है। मॉडल मानेसर (गुरुग्राम) में बना और शापुरजी पालनजी कंपनी से इसे बनाया है।

प्रतिमा में 26618 क्यूबिक मीटर सीमेंट-कंक्रीट लगा है। मॉडल मानेसर (गुरुग्राम) में बना और शापुरजी पालनजी कंपनी से इसे बनाया है।

पहली प्रतिमा, जो सॉफ्टवेयर व रोबोटिक मशीन से तैयार की गई
मूर्तिकार नरेश कुमावत ने बताया कि यह प्रतिमा आर्ट और टेक्नोलॉजी का सबसे बेहतर उदाहरण है। इतनी बड़ी प्रतिमा बिना टेक्नोलॉजी के संभव नहीं थी। यह एक मात्र ऐसी प्रतिमा है जो सॉफ्टवेयर व रोबोटिक मशीन से तैयार किया गया।

उन्होंने बताया कि इस प्रतिमा को सबसे पहले थ्री डी सॉफ्टवेयर में तैयार किया गया था। इसके बाद रोबोटिक मशीन (CNC) के जरिए इसके ढांचे बनाए गए।

इसमें 3000 टन स्टील लगा और 2600 टन लोहा लगा है। इसे पूरा बनने में करीब 10 साल का समय लगा।

इसमें 3000 टन स्टील लगा और 2600 टन लोहा लगा है। इसे पूरा बनने में करीब 10 साल का समय लगा।

2012 में मुरारी बापू की ओर से इस प्रतिमा की नींव रखी गई थी। अब 29 अक्टूबर को मुरारी बापू के हाथों ही इसका लोकार्पण हुआ है।

2012 में मुरारी बापू की ओर से इस प्रतिमा की नींव रखी गई थी। अब 29 अक्टूबर को मुरारी बापू के हाथों ही इसका लोकार्पण हुआ है।

70 से ज्यादा मॉडल तैयार किए, एक-एक अंग सॉफ्टवेयर में डिजाइन

विश्वास स्वरूप की प्रतिमा के हर अंग पर बड़ी बारीकी से काम किया गया है। चेहरे के भाव से लेकर उनके आसन के डिजाइन के लिए कई लोगों की टीम जुटी रही। प्रतिमा के 70 से ज्यादा मॉडल तैयार किए गए। इनमें से एक मॉडल जो आज बनकर तैयार है इसे फाइनल किया गया। बताया गया कि बाहर से नजर आने वाला पूरा स्ट्रक्चर सॉफ्टवेयर में डिजाइन किया गया।

मॉडल फाइनल होने के बाद इसी हाइट और स्ट्रक्चर के साथ इसे थ्री-डी स्कैनिंग में ढाला गया। इसके बाद इसी टेक्नोलॉजी से भगवान शिव के अलग-अलग स्ट्रक्चर गुरुग्राम के स्टूडियो में तैयार किए गए।

इसे पहाड़ी पर बनाया गया है। प्रतिमा की नींव रखने से पहले सॉइल और रॉक टेस्ट किया गया।

इसे पहाड़ी पर बनाया गया है। प्रतिमा की नींव रखने से पहले सॉइल और रॉक टेस्ट किया गया।

10 साल तक इस प्रतिमा का काम बिना रुके चला। कोविड में केवल लॉकडाउन के दौरान इसका काम बंद रहा।

10 साल तक इस प्रतिमा का काम बिना रुके चला। कोविड में केवल लॉकडाउन के दौरान इसका काम बंद रहा।

यह प्रतिमा RCC, स्टील और कंक्रीट से मिलकर तैयार की गई है। इसके बाहर का स्ट्रक्चर गुरुग्राम में तैयार किया गया।

यह प्रतिमा RCC, स्टील और कंक्रीट से मिलकर तैयार की गई है। इसके बाहर का स्ट्रक्चर गुरुग्राम में तैयार किया गया।

350 लोगों की टीम जुटी

इस प्रतिमा को गुरुग्राम के मूर्तिकार नरेश कुमावत की ओर से तैयार किया गया। 10 साल पहले तद पदम उपवन संस्था के ट्रस्टी मदन पालीवाल की ओर से इस प्रोजेक्ट का प्लान सौंपा था। इसे पूरा करने के लिए करीब 350 लोगों की टीम स्टूडियों में दिन-रात जुटी रही। इसके अलावा साइट पर करीब 1500 लोग हर समय अलग-अलग शिफ्ट में मौजूद थे।

270 फीट की हाइट पर भगवान शिव का त्रिशूल है। इसे मेटल के 250 टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है।

270 फीट की हाइट पर भगवान शिव का त्रिशूल है। इसे मेटल के 250 टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है।

आसन की मुद्रा वाले पैर और हाथ 75 फीट के हैं। भगवान शिव के इस स्ट्रक्चर को सॉफ्टवेयर और रोबोटिक मशीन द्वारा तैयार किया गया है।

आसन की मुद्रा वाले पैर और हाथ 75 फीट के हैं। भगवान शिव के इस स्ट्रक्चर को सॉफ्टवेयर और रोबोटिक मशीन द्वारा तैयार किया गया है।

भगवान शिव का आसान करीब 110 फीट की ऊंचाई पर है। जहां भगवान शिव विराजे हैं उसे पूरे एरिया का स्ट्रक्चर कैलाश पर्वत जैसा तैयार किया गया है।

भगवान शिव का आसान करीब 110 फीट की ऊंचाई पर है। जहां भगवान शिव विराजे हैं उसे पूरे एरिया का स्ट्रक्चर कैलाश पर्वत जैसा तैयार किया गया है।

चैलेंज कम समय में प्रतिमा को तैयार करना, कनाड़ा मंगाई मशीन

मूर्तिकार नरेश कुमावत ने बताया कि सबसे बड़ा चैलेंज था कि कम समय में कैसे इस प्रतिमा को तैयार किया जाए। इसके लिए कुछ मशीनों की जरूरत थी। इसके लिए मदन पालीवाल के सामने प्रपोजल रखा गया। स्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए कनाड़ा से मशीन मंगवाई गई, जिससे कम समय में भगवान शिव के स्ट्रक्चर को तैयार किए गए।

इस प्रतिमा की खासियत यह है कि जब इसका निर्माण शुरू किया गया तो इसे हर परीक्षण से गुजारा गया। मिट्‌टी से लेकर पत्थरों और हवा व पानी का परीक्षण किया गया। सारे टेस्ट में यह प्रतिमा खरी उतरी।

इस प्रतिमा की खासियत यह है कि जब इसका निर्माण शुरू किया गया तो इसे हर परीक्षण से गुजारा गया। मिट्‌टी से लेकर पत्थरों और हवा व पानी का परीक्षण किया गया। सारे टेस्ट में यह प्रतिमा खरी उतरी।

निर्माण कार्य की शुरुआत में 251 फीट ऊंची शिव प्रतिमा बनाना तय किया गया था, लेकिन बाद में इसकी ऊंचाई 351 फीट करने का निर्णय लिया गया। जब प्रतिमा 351 फीट बनकर तैयार हुई तो इस पर गंगा की जलधारा लगाने का आइडिया आया। इसी के बाद इस पर जब यह जलधारा लगाई तो इसकी ऊंचाई बढ़कर 369 फीट हो गई।

निर्माण कार्य की शुरुआत में 251 फीट ऊंची शिव प्रतिमा बनाना तय किया गया था, लेकिन बाद में इसकी ऊंचाई 351 फीट करने का निर्णय लिया गया। जब प्रतिमा 351 फीट बनकर तैयार हुई तो इस पर गंगा की जलधारा लगाने का आइडिया आया। इसी के बाद इस पर जब यह जलधारा लगाई तो इसकी ऊंचाई बढ़कर 369 फीट हो गई।

इस प्रतिमा को बारिश और धूप से बचाने के लिए जिंक की कोटिंग कर कॉपर कलर किया गया है।

इस प्रतिमा को बारिश और धूप से बचाने के लिए जिंक की कोटिंग कर कॉपर कलर किया गया है।

सबसे अनूठे नंदी, पैरों में घूंघरू और डांसिंग मुद्रा में
नरेश कुमावत ने बताया कि शिव प्रतिमा के किसी भी हिस्से को स्टूडियों में तैयार करते तो उस पर मदन पालीवाल से डिस्कशन जरूर होता था। वे कई बार स्टूडियों भी आए और इस दौरान उन्होंने अपने आइडिया को शेयर किया।इसी का नतीजा था कि उनके साथ काम करते-करते हमें आइडिया मिल गया था कि नंदी कैसे बनाने हैं और टीम ने डिसाइड किया कि नंदी की अनूठी प्रतिमा बनानी है।

ऐसे में तय किया गया कि जैसे भगवान शिव मुस्करा रहे हैं वैसे ही नंदी बनाने हैं। इस पर डांसिंग और खड़ी मुद्रा में नंदी की प्रतिमा तैयार हुई। उन्होंने बताया कि शिव के सामने नंदी बैठी हुई मुद्रा में है। लेकिन, यहां नंदी खड़े हैं और पैरों में घुंघरू पहन डांस कर रहे हैं।

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विश्वास स्वरूपम…ये विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा है। हाइट 369 फीट।

जब आप उदयपुर-राजसमंद हाईवे से गुजरेंगे तो आपको भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में नजर आएंगे।

29 अक्टूबर से इसके लोकार्पण समारोह की शुरुआत हो रही है। मुरारी बापू की रामकथा से इसकी शुरुआत होगी। CM अशोक गहलोत भी इस दिन मौजूद रहेंगे। 9 दिन चलने वाले इस समारोह में 7 से 8 स्टेट के CM समेत कई मिनिस्टर और सेलिब्रिटी शामिल होंगे।

अब तक आपने प्रतिमा के बाहर के स्वरूप के दर्शन किए होंगे, लेकिन दैनिक भास्कर पहली बार इसके अंदर के व्यू को दिखा रहा है।

बाहर से दिखने वाली इस प्रतिमा की खूबी ये है कि इसके अंदर बने हॉल में 10 हजार लोग एक साथ एक समय में आ सकते हैं, यानी एक गांव या कस्बा इस प्रतिमा में बस सकता है। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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विश्व की सबसे ऊंची 369 फीट की शिव प्रतिमा का शनिवार शाम राजसमंद जिले के नाथद्वारा में लोकार्पण हो गया। हालांकि इस सिलसिले में आयोजन 9 दिन तक चलना है। जितनी बड़ी भगवान शिव की प्रतिमा है, उतना ही बड़ा ये आयोजन। 42,016 की आबादी (2011 की जनगणना के अनुसार) वाले नाथद्वारा में इस दौरान दुनियाभर से आए 1 लाख शिव भक्त इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। डोमिनिका (72,167), मोनाको (39,511) जैसे देशों की तो इतनी आबादी भी नहीं है, जितने शिव भक्त नाथद्वारा में लोकार्पण समारोह में मौजूद रहे। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)

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दुनिया में शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा कहां है?

जवाब- नाथद्वारा

करीब 10 साल में ये प्रतिमा बनकर तैयार हुई, अनावरण भी हो चुका है। …लेकिन इस प्रतिमा को बनाने वाले दो चेहरे ऐसे हैं, जिन्होंने हर हाल में इसे पूरा करने की ठानी। ये हैं मूर्ति को बनवाने वाले मदन पालीवाल और मूर्ति बनाने वाले नरेश कुमावत।

मदन पालीवाल और नरेश कुमावत ने भास्कर से उनकी लाइफ और शिव प्रतिमा बनने के 10 सालों के सफर को शेयर किया।

तद पदम उपवन संस्था के ट्रस्टी मदन पालीवाल ने बताया कि कभी वह इसी शहर में एक प्याऊ पर लोगों को पानी पिलाया करते थे। बीमारी के चलते खून की उल्टियां होती थीं, लेकिन काम करना नहीं छोड़ा। आज उसी शहर में दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा का निर्माण करवाया है।

इन 10 साल में कैसे मूर्ति को तैयार किया गया, क्या चुनौतियों सामने आईं, ये सब बताएंगे मूर्तिकार नरेश कुमावत। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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