1908 वजनी बड़े रिएक्टर रिफाइनरी में इस्टॉल, 10 घंटे लगे: रिएक्टर में क्रूड ऑयल होगा फिलटर, लागत से ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन



बाड़मेर37 मिनट पहले

11 माह बाद गुजरात से रवाना हुए रिएक्टर पहुंचे पचपदरा रिफाइनरी।

11 माह बाद 550 किलोमीटर लंबे रोमांचक और खतरों से भरा सफर तय करने के बाद दो बड़े रिएक्टर रिफाइनरी (बाड़मेर) पहुंचे गए है। 1908 टन वजनी दो रिएक्टर को लाने के लिए 832 टायरों वाले 2 ट्रेलरों को खींचने के लिए 5 ट्रकों का इस्तेमाल किया गया। दोनों रिएक्टर को ट्रेलर से सीधे दो क्रेनों की मदद से रिफाइनरी में इस्टॉल किया गया है। इसको इस्टॉल करने में करीब 10 घंटे का समय लगा। इन रिएक्टर में क्रूड ऑयल फिलटर होने के बाद अन्य पार्ट में जाएगा। इन रिएक्टरों को रिफाइनरी की अहम् कड़ी माना जाता है।

रिएक्टर इंस्टॉल करने में लगे 10 घंटे, हेल्पर, टेक्निकल सहित 100 लोगों की लेनी पड़ी मदद

दरअसल, मुंबई की कंपनी ने भरूच गुजरात में इन दो रिएक्टर को तैयार किया था। इसके लिए यूरोप से मेटल से बनाया गया है। भरूच से छोटे बंदरगाह से मुद्रा पोर्ट लाया गया। वहां से सड़क मार्ग से 550 किलोमीटर बाड़मेर पचपदरा रिफाइनरी पहुंचा है। 550 किलोमीटर के इस सफर नर्मदा केनाल पार करने के लिए एक अस्थाई पुल का निर्माण करवाया गया। जिसकी लागत 4 करोड़ रुपए आई थी। दूसरे पुल के लिए पास से अस्थाई सड़क भी बनाई गई। इसके अलावा बड़ी संख्या में बाइपास सड़कें भी बनाई गई। 20 अक्टूबर को रिफाइनरी पहुंच गए।

रिफाइनरी 20 अक्टूबर को रिएक्टर पहुंचे, 21 को रिएक्टर को किया गया।

रिफाइनरी 20 अक्टूबर को रिएक्टर पहुंचे, 21 को रिएक्टर को किया गया।

इस्टॉल करने में लगे 10 घंटे

रिफाइनरी पहुंचने के बाद शुक्रवार को ट्रेलर से सीधा नीचे उतारकर सीधे इस्टॉल किया गया। इस्टॉल करने में करीब-करीब 9-10 घंटे लगे। 3 हजार टन की दो क्रेन की मदद से इस्टॉल किया गया है। वहीं 100 से ज्यादा हेल्पर, टेक्निकल सहित अन्य लोगों की हेल्प लेनी पड़ी थी।

यह यूज होगा रिएक्टर

एचआर मैनेजर आशुतोष के मुताबिक गुजरात भरूच से आए रिएक्टर को इस्टॉल करवा दिया गया है। इसके अंदर क्रूड ऑयल आएगा। यह रिएक्टर क्रूड ऑयल को रिफाइंड (फिलटर) करने के बाद अलग-अलग पार्ट में जाएगा। कई चीजों इससे बनेगी।

करीब 40 अस्थाई सड़क, 1 पुल, बाइपास रास्ते बनाए गए। 11 माह में सर्दी, गर्मी, बरसात में सफर में निकाल दी।

करीब 40 अस्थाई सड़क, 1 पुल, बाइपास रास्ते बनाए गए। 11 माह में सर्दी, गर्मी, बरसात में सफर में निकाल दी।

रिएक्टर की लागत से दो गुणा ज्यादा ट्रांसपोर्ट का खर्चा

गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से 832 टायरों वाले ट्रेलर पर करीब 11 महीने पहले नवंबर 2021 को रवाना हुए थे। इन पर दो रिएक्टर लदे हैं। दोनों रिएक्टरों का वजन 1908 मीट्रिक टन है। एक मीट्रिक टन 1000Kg के बराबर होता है। दोनों ट्रेलरों को नर्मदा नदी पार कराने में ही 4 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े। रिएक्टर को देखने के लिए नेशनल व मेगा हाइवे पर लोग देखने पहुंच जाते थे। सेल्फी लेने वालों की भीड़ जमा हो गई। रिएक्टर का पूरा रूट मैनेजमेंट देख रहे टेक्निकल ऑफिसर इन रिएक्टर को लाने के दौरान करीब 40 अस्थाई सड़क बनाई गई हैं। करीब 20 अस्थाई सड़कें और बाइपास तो 20 राजस्थान में बनाए गए।

ट्रेलर की रोज मेंटेनेंस

टेक्निकल हाइड्रॉलिक मैकेनिक हेड शंकर के मुताबिक ट्रेलर की रोज मेंटनेंस में हाइड्रॉलिक, ग्रीसिंग, ऑयल वगैरा सब चैक किया जाता था। सड़क पर चलाने के लिए बेलेंस देखना पड़ता है। पूरी टीम आगे रूट देखती है और जहां पर जरूरत होती है वहां पर बाइपास व अस्थाई सड़का का निर्माण करते थे। 11 माह में टीम ने सर्दी, गर्मी और बरसात सड़क पर सफर में ही बिताए थे।

11 माह तक बिताए सड़कों

रियाज मोहम्मद के मुताबिक एक साल से इन गाड़ियों में ही थे। गाड़ी पिक्चर होने पर उसे बदलना, साइड देखना और वोल्वो ट्रक गाड़ियों को ज्वाइंट करने का काम होता थाा। ज्वाइट करने के लिए चार-पांच आदमी लगते है। खाना गाड़ी में ही बनता है और पानी गाड़ियों से भरकर ले आते है।

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