संस्कारी नेताजी की अय्याशी के सबूत दिल्ली पहुंचाए: राहुल की यात्रा में खोया मंत्रीजी का महंगा विदेशी चश्मा; विरोधी एक साथ CM हाउस में



  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Minister Lost Expensive Foreign Spectacles During Rahul’s Visit; Opponents Reached CM House Together

जयपुर22 मिनट पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

पार्टी विद डिफरेंस में संगठन से जुड़े एक संस्कारी नेताजी के किस्से इन दिनों दिल्ली से लेकर जयपुर तक चर्चाओं में है। नेताजी के पथभ्रष्ट होने की लंबी चौड़ी शिकायतें दिल्ली पहुंचाई गई हैं। शिकायतों में नेताजी की अय्याशी का भी जिक्र है।

दबी जुबां में नेताजी को लेकर कई बातें पहले भी सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब विरोधी खेमे के कुछ नेताओं ने लिखित में बहुत सी बातें टॉप लेवल पर पहुंचाई हैं।

अब विरोधी खेमे को एक्शन का इंतजार है। मामला संगठन से जुड़ा है इसलिए हर कोई नेता इसमें दिलचस्पी ले रहा है, लेकिन चुपके चुपके। कई नेताओं को हिसाब चुकता करना है, इसलिए सक्षम लेवल पर बात पहुंचाने में पूरी सियासी सतर्कता बरती गई है।

वैसे, जब लगातार शिकायतें मिले तो नेता विवादों में तो आ ही जाता है। ऐसे में संगठन में जिम्मेदारी भी बदल ही सकती है। विरोधी भी परिवर्तन ही तो चाहते हैं।

मंत्रीजी का चश्मा

सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेता शुरू से ही भारत जोड़ो यात्रा को भविष्य का सियासी बूस्टर मानकर इसमें हाजिरी लगाना नहीं छोड़ रहे। पिछले दिनों कुछ मंत्री भी इस यात्रा में हाजिरी लगाने पहुंचे थे।

इसके फोटो भी सबूत के तौर पर सोशल मीडिया पर डाले गए थे। अब यात्रा तो यात्रा है कोई कितना ही वीआईपी हो, भीड़ में तो फंस ही जाता है।

यात्रा की भीड़ में एक मंत्रीजी का चश्मा खो गया। चश्मा खोने का दर्द मंत्रीजी को अब तक है, इसका जिक्र भी उन्होंने नजदीकियों से किया। दरअसल चश्मा विदेशी था।

अब विदेशी चश्मे की कीमत तो पांच से छह अंकों में ही होती है। महंगी चीज खोने का दुख होना स्वाभाविक है। अब मंत्रीजी के लिए विदेश से ही दूसरा चश्मा आएगा, लेकिन तब तक इंतजार तो करना ही पड़ेगा।

मुखिया ने थपथपाई बयानवीर मंत्रीजी की पीठ

सत्ताधारी पार्टी की राजनीति की गांठों को समझना आसान नहीं है। जितने नेता उतने ही सियासी रंग और उतनी ही सियासी गांठें। सियासी सीजफायर वाले दिन अंदर बैठक में दिल्ली वाले नेताजी ने खूब चेतावनी दी, सबको समझाया। बैठक खत्म होने के बाद प्रदेश के मुखिया एक मंत्री की हौसला अफजाई करते दिख रहे थे। मंत्रीजी के बयानों-भाषणों की तारीफ हो रही थी।

इन मंत्रीजी ने युवा नेता के खेमे के खिलाफ बयानबाजी का मोर्चा संभाल रखा था और कोसने में सबसे आगे थे। इस हौसला अफजाई के मायने तलाशे जा रहे हैं। अब अपने-अपने एसेट को तो संभालकर ही रखना होगा, इस हौसला अफजाई के पीछे भी यही वजह बताई जा रही है।

सामाजिक नेता की नई एसयूवी और नेताजी का हेलिकॉप्टर चर्चा में

सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति की एक-एक एक्टिविटी पर बारीक निगाह रहती है। कोई किस गाड़ी से चल रहा है, कहां शॉपिंग कर रहा है, यह तक जानकारियां लोग निकाल लाते हैं। सत्ता के गलियारों में एक सामाजिक नेता की नई एसयूवी खूब चर्चा में है।

सामाजिक नेता के शुभचिंतक इन चर्चाओं से बड़े आहत दिखे। कह रहे हैं- क्या जमाना आ गया? कोई ढंग की गाड़ी भी खरीद ले तो लोग तरह-तरह की बातें करने लग जाते हैं।

अब आंदोलन वाले नेता सत्ता से मिलते हैं तो बातें तो होती ही हैं। साामाजिक नेता की गाड़ी का ब्रांड वही है जिसका जिक्र एक क्रांतिकारी मंत्रीजी ने युवा नेता को सीएम नहीं बनाने पर अगले चुनावों सत्ताधारी पार्टी के विधायकों को बैठाने के लिए किया था। एसयूवी के अलावा एक फायरब्रांड नेताजी का उपचुनावों में इस्तेमाल किया हेलिकॉप्टर भी चर्चाओं में है।

इंटरव्यू लेने वालों को विधायक ने उलझाया

भारत जोड़ो यात्रा के लिए पिछले दिनों सत्ताधारी पार्टी के मुख्यालय में दो दिन इंटरव्यू चले। प्रदेश भर से बड़ी संख्या में युवा से लेकर बुजर्ग नेता तक इंटरव्यू देने पहुंचे।

जो फिजिकिली फिट नहीं थे उन्हें लौटा दिया गया। इंटरव्यू देने के लिए युवा नेता के समर्थन में प्रदेश के मुखिया के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले विधायक भी पहुंच गए।

विधायक को देखकर इंटरव्यू लेने वाले दुविधा में पड़ गए। विधायक का क्या इंटरव्यू लें? विधायक इंटरव्यू लेने वाले एक नेताजी के साथी रहे हैं। नेताजी ने यह कहकर विदा किया कि विधायक तो यात्रा में लोग लेकर आएंगे ही उन्हें इंटरव्यू देने की कहां जरूरत है?

विपक्षी पार्टी की सभा में भीड़ की विराट थ्येारी

सत्ताधारी पार्टी की तरह विपक्षी पार्टी के नेताओं में भी आंतरिक लोकतंत्र कम नहीं है। लकीर छोटा करने की होड़ दोनों तरफ बराबर है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा में भीड़ पर विरोधियों ने ही नहीं अपनों ने भी सवाल उठा दिए। भीड़ को लेकर मंच पर बैठे एक दिग्गज नेता ने कमेंट किया कि कितनी विराट सभा है?

मंच पर कई नेताओं ने विराट पर कमेंट किए। यह बात किसी ने सुन ली। अब इस विराट कमेंट से किसकी लकीर छोटी हुई, यह विपक्षी पार्टी की सियासत में दिलचस्पी रखने वाले समझ गए हैं। बड़े नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने वह सब बातें कह दीं, जो विरोधी नेता की लकीर छोटा करने के लिए काफी थीं।

आमने-सामने चुनाव लड़ चुके नेता एक साथ क्यों गए सीएम हाउस ?

चुनावी राजनीति में वोट के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ता। पिछले दिनों सांभर को जिला बनाने की मांग को लेकर राजधानी में बड़ा प्रदर्शन हुआ। बाद में सत्ता के सबसे बड़े केंद्र पर डेलिगेशन को मिलने बुलाया, लेकिन प्रदेश के मुखिया राजधानी में नहीं थे। इस डेलिगेशन को आमने सामने चुनाव लड़ चुके नेता लीड कर रहे थे। दोनों सियासी मतभेद भूलकर साथ आए।

जब सत्ता केंद्र पर प्रदेश के मुखिया की जगह अफसर दिखे और चाय की मनुहार की तो दोनों उबल पड़े। अफसर से कह दिया कि चाय पीने नहीं आए हैं; मुखिया के नजदीकी अफससर ने उन्हें विनम्रता से समझा दिया कि जिला बनाना तो मुखिया के ही हाथ है, आपकी अर्जी पहुंचाना मेरा काम है।

अब डेलिगेशन के बाकी लोगों को भी तो प्रभाव दिखाना था इसलिए बिगड़ना जरूरी था, लेकिन इस बिगड़ने से बना कुछ नहीं।

नेताजी की मोटरसाइकिल डायरी, दो नेताओं का सियासी मिलन

पाकिस्तान से लगते सीमावर्ती जिले की राजनीति भी दिलचस्प है। यहां इन दिनों विरोधी रहे नेता एक हैं। संगठन के लिए मंत्री पद छोड़ चुके नेताजी इन दिनों फायरब्रांड मोड पर हैं।

नेताजी लगातार सक्रिय हैं। पहले नाराज चल रहे भावुक मंत्रीजी को नेताजी ने इन दिनों साथ ले लिया है। बॉर्डर पर नेताजी ने भावुक स्वभाव वाले मंत्रीजी को मोटरसाइकिल पर बैठाकर सियासी मैसेज भी दिया।

सियासत की उलटबासी देखिए, मोटरसाइकिल ड्राइव कर रहे नेताजी जब मंत्री बने थे तो उनकी वजह से भावुक मंत्रीजी को बाहर होना पड़ा था।

नेताजी से वे लंबे समय से नाराज रहे थे। अब जब मौजूदा मंत्रीजी को पिछले साल तब पद मिला जब नेताजी का मंत्री पद चला गया। दोनों की सियासी एकता ने सीमावर्ती जिले के सियासी समीकरण बदल दिए हैं।

भगवान की शरण में मंत्री

सरकार के कई मंत्री मंदिरों में दर्शन करते रहते हैं, लेकिन इन दिनों दो मंत्रियों की आस्था ज्यादा चर्चा में है। बड़े महकमों के मालिक दो मंत्री पिछले दिनों भगवान कृष्ण के दर पहुंचे। आम तौर पर जो पूजा अनुष्ठान पुजारी करते थे वे खुद हाथों से किए। दोनों मंत्री इन दिनों किसी न किसी कारण से संकट में हैंं।

एक मंत्रीजी पार्टी के मामले में तो दूसरे अफसरों से बर्ताव को लेकर निशाने पर आ गए। अब संकट में तो भगवान की शरण में ही जाया जाता है। दोनों मंत्रियों पर फिलहाल संकट टल भी गया है, अब यह आस्था से हुआ या अंदरूनी राजनीति से यह कहना मुश्किल है।

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी

वॉइस ओवर: प्रोड्यूसर राहुल बंसल

सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

राजस्थान के कई नेताओं की CD हो सकती है लीक:विस्फोटक रिकॉर्डिंग प्रदेश में ला सकता है सियासी भूचाल

खबरें और भी हैं…



Source link


Like it? Share with your friends!

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
0
win
khabarplus

0 Comments

Your email address will not be published.