वारसी ब्रदर्स की कव्वाली पर झूमे श्रोता: इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल के समापन पर मालवा के तिपानिया की कबीर वाणी का जादू



जोधपुरएक घंटा पहले

राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (RIFF) का सोमवार को समापन हो गया। जोधपुर में हुए इस आयोजन में सोमवार सुबह सुबह 5:30 बजे से 7:30 बजे जसवंतथड़ा पर मालवा के प्रहलाद तिपानिया एंड पार्टी की ओर से संत कबीर की वाणी की प्रस्तुति के साथ रिफ का समापन हुआ।

प्रहलाद देश के जाने-माने कबीरपंथी हैं। वे देश-विदेश में कई जगह परफॉर्म कर चुके हैं। इससे पहले रविवार रात शरद पूर्णिमा पर धवल चांदनी में मेहरानगढ की जनाना ड्योडी में दिल्ली घराने के कव्वाल वारसी ब्रदर्स ने अपनी कव्वाली सुनाना शुरू किया तो उनकी खनकती आवाज श्रोताओं को रुहानी सुकून का अहसास करा गई।

कव्वालियों ने राजस्थानी लोक गीत – केसरिया बालम – जब अपने अंदाज से गाया तो चारों ओर से तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। मेरा पिया घर आया, छाप तिलक सब छोड़ी और दमादम मस्त कलंदर गाया तो श्रोता मस्त होकर झूमने को मजबूर हो गए। हैदराबाद से आए इन कव्वालों की प्रस्तुति के दौरान श्रोता स्टेज के आगे आकर नाचने लगे। वे एक के बाद वे कव्वाली सुनाते रहे और श्रोता वाह.. वाह के साथ वंस मोर.. की डिमांड करते रहे।

दिल्ली घराने के कव्वाल वारसी ब्रदर्स ने अपनी कव्वाली सुनाना शुरू किया तो उनकी खनकती आवाज श्रोताओं को रुहानी सुकून का अहसास करा गई।

पल्लो लटके ने मचाया धमाल
रविवार आधी रात में जब सेक्सोफोनिस्ट और प्रोड्यूसर राइस सेबेस्टियन ने राजस्थानी व वेस्टर्न धुनों के बीच पल्लो लटके सोंग की धुन छेड़ी तो श्रोता स्टेज के पास आकर नाचने लगे। खड़ताल, ड्रम, सेक्सोफोन पर दमादम मस्त कलंदर की प्रस्तुति पर देसी विदेशी पर्यटक नाचते रहे।

खड़ताल, ड्रम, सेक्सोफोन पर दमादम मस्त कलंदर की प्रस्तुति पर देसी विदेशी पर्यटक नाचते रहे।

खड़ताल, ड्रम, सेक्सोफोन पर दमादम मस्त कलंदर की प्रस्तुति पर देसी विदेशी पर्यटक नाचते रहे।

रजवाड़ी मांड व कामायचा की जुगलबंदी
इससे पहले मेन स्टेज पर तुर्की के युर्दल टोकन ने पारंपरिक वाद्य यंत्र ओड पर अपनी अंगुलियों का कमाल दिखाया। कई नई शैली को जोड़कर उन्होंने तुर्की के ग्रामीण इलाकों की लोक धुनें प्रस्तुत कीं। रिफ में पहली बार परफॉर्म कर रहे अनीता और प्रेम डांगी ने रजवाड़ी मांड की प्रस्तुति दी। घेवर और दर्रा मांगणियार ने कमायचा पर बेहतरीन जुगलबंदी की।

राजस्थान के सवाई खान ढोलक, मोरचंग, भपंग के साथ और असिन खां लंगा सिंधी सारंगी के साथ गाने में सहयोग दे रहे थे।

राजस्थान के सवाई खान ढोलक, मोरचंग, भपंग के साथ और असिन खां लंगा सिंधी सारंगी के साथ गाने में सहयोग दे रहे थे।

कोरोना के कारण दो साल बाद हो रहे रिफ में इस बार विदेशी दर्शकों के साथ देसी श्रोताओं का उत्साह भी दिखा। सुबह से लेकर रात तक हो रहे इस फेस्टिवल के हर कार्यक्रम में म्यूजिक लवर्स की खासी तादाद नजर आई। सोमवार सुबह जसवंतथड़ा पर मालवा के प्रहलाद तिपानिया की प्रस्तुति के साथ पांच दिवसीय जोधपुर रिफ का समापन हुआ।

सिटाडेल्स ऑफ द सन
सिटाडेल्स ऑफ द सन सेशन शुरू करते हुए जोधपुर रिफ के डायरेक्टर दिव्य भाटिया ने भारत और आयरलैंड के बीच लोक संस्कृति के आदान-प्रदान के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आयरिश और राजस्थानी कलाकारों ने 2019 में जुगलबंदी शुरू की थी। लेकिन फिर कोरोना के कारण रिफ नहीं हो पाया। लेकिन लॉकडाउन के दौरान भी दोनों देशों के कलाकारों ने अपनी संगीत रचनाओं को ऑनलाइन शेयर करते हुए नई रचनाओं को बनाना जारी रखा।

डोनेगल और राजस्थान के कलाकारों ने इन्हीं तैयार धुनों को रिफ के मंच पर पेश कर श्रोताओं की खूब दाद लूटी। इनमें डोनेगल के सारा ई कलन, मार्टिन कोयल और पॉल कटलिफ के साथ राजस्थान के सवाई खान ढोलक, मोरचंग, भपंग के साथ और असिन खां लंगा सिंधी सारंगी के साथ गाने में सहयोग दे रहे थे। सुरों और स्वर के साथ इस टीम ने ऐसी रचनाएं तैयार की जो दोनों संस्कृतियों को एक पुल की तरह जोड़ती महसूस हुई।

कव्वाल ने राजस्थानी लोक गीत केसरिया बालमा जब अपने अंदाज से गाया तो चारों ओर से तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। मेरा पिया घर आया..... छाप तिलक सब छोड़ी..... और दमादम मस्त कलंदर गाया तो श्रोता मस्त होकर झूमने को मजबूर हो गए।

कव्वाल ने राजस्थानी लोक गीत केसरिया बालमा जब अपने अंदाज से गाया तो चारों ओर से तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। मेरा पिया घर आया….. छाप तिलक सब छोड़ी….. और दमादम मस्त कलंदर गाया तो श्रोता मस्त होकर झूमने को मजबूर हो गए।

जसवंतथड़ा पर हुआ मूनराइज सेशन
मूनराइज सेशन में जसवंतथड़ा पर जब चांद बादलों की ओट से अपनी धवल चांदनी बिखेरने की तैयारी कर रहा था तो जोधपुर में ही जन्मे सारंगीवादक दिलशाद खान अपनी सारंगी पर मधुर धुनें सुनाने की तैयारी कर रहे थे।

सिंदूरी होती जा रही शाम में उनके साथ पखावज वादक प्रताप पाटिल तैयार थे और शास्त्रीय धुनों को साथ देने के लिए बांसुरी वादक और तबला वादक भी थे। खचाखच भरे जसवंतथड़ा के चौक में देवदास, मोहब्बतें, गुजारिश जैसी 500 से ज्यादा मूवीज में अपनी सारंगी की धुनें बिखरे चुके दिलशाद यहां अपनी कई रागों की बंदिशें पेश की।

राजस्थान के सवाई खान ढोलक, मोरचंग, भपंग के साथ और असिन खां लंगा सिंधी सारंगी के साथ गाने में सहयोग दे रहे थे।

राजस्थान के सवाई खान ढोलक, मोरचंग, भपंग के साथ और असिन खां लंगा सिंधी सारंगी के साथ गाने में सहयोग दे रहे थे।

श्रोताओं की डिमांड पर उन्होंने मूवी में दी गई धुनें भी सुनाईं। इन रेजिडेंस में बीबीसी लंदन और कोक स्टूडियो के लिए शो कर चुके सूफी गायक सावन ने अपनी विशिष्ट शैली में सूफी रचनाएं सुनाईं। कचरा खां ने छाप तिलक सब छोड़ी… और दमादम मस्त कलंदर… जैसे गानों के साथ सूफियाना सिंधी और पंजाबी सिंधी में बुल्ले शाह के कलाम सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।

लंगा कलाकारों ने मूसे और राशिद की कुछ रचनाएं पेश की। फोर्ट फेस्टिविटीज में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन चला। इनमें गैर नृत्य, आंगी नृत्य सहित कई तरह के नृत्यों की बारीकियां जानने को विदेशी उत्सुक नजर आए।

कोरोना के कारण दो साल बाद हो रहे रिफ में इस बार विदेशी दर्शकों के साथ देसी श्रोताओं का उत्साह भी दिखा। विदेशी पर्यटक राजस्थानी परिधान में रिफ में हिस्सा लेने पहुंचे।

कोरोना के कारण दो साल बाद हो रहे रिफ में इस बार विदेशी दर्शकों के साथ देसी श्रोताओं का उत्साह भी दिखा। विदेशी पर्यटक राजस्थानी परिधान में रिफ में हिस्सा लेने पहुंचे।

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