राजसमंद में बैठकर अमेरिकन को ठगने वाला अरबपति मास्टरमाइंड: पुलिस से बचने के लिए बनाया किलेनुमा महल, कैश-गोल्ड देख CBI भी हैरान



राजसमंद32 मिनट पहले

हैलो, मैं बॉब बोल रहा हूं, आपने टैक्स नहीं भरा है, आपको हजारों डॉलर की पेनल्टी भरनी होगी……

राजस्थान के जंगलों में बैठे बॉब का ये कॉल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में जिस किसी शख्स ने भी उठाया, समझो ठगा गया। एक कॉल की कीमत सैकड़ों डॉलर देकर चुकानी पड़ी, लेकिन ठगी की पूरी स्क्रिप्ट लिखने वाले बॉब ने काली कमाई से ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जिसे देखकर CBI भी दंग रह गई।

विदेशियों से ठगी कर बेशुमार दौलत कमाने वाला ये बॉब कोई और नहीं बल्कि राजसमंद जिले में एक टायर फैक्ट्री में कभी मजदूरी करने वाले का बेटा कमल सिंह है। उसकी तलाश अमेरिका की FBI, कैनेडियन, ऑस्ट्रेलियाई पुलिस कर रही थी। इंटरपोल ने जब भारत की CBI से संपर्क किया तो 4 अक्टूबर को देश में एक साथ 115 ठिकानों पर रेड मारी गई।

कमल उर्फ बॉब को पकड़ने के लिए CBI टीम राजसमंद जिले के कांकरोली पहुंची तो पता चला कि कमल का पूरा परिवार ही घर से कॉल सेंटर ऑपरेट कर रहा था। उसके घर की तलाशी में मिले 1.8 करोड़ कैश को गिनने के लिए मशीन मंगवानी पड़ी। वहीं, डेढ़ किलो से ज्यादा गोल्ड भी बरामद हुआ।

गुपचुप तरीके से हुई इस कार्रवाई के बाद भास्कर टीम अमेरिकी लोगों को ठगने वाले कमल सिंह के गुप्त ठिकाने तक पहुंची। करीब तीन दिन तक पूरे रैकेट की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं।

जिस कमल सिंह उर्फ बॉब को सीबीआई ने पकड़ा, वो जंगलों में 50 करोड़ के आलीशान महल में रह रहा था। उसके फार्मबहाउस में लग्जरी कारों के कलेक्शन से लेकर ऐश-ओ-आराम की हर चीज मौजूद थी।

कभी मजदूरी कर घर चलाने वाला परिवार आखिर कैसे अरबों का मालिक बन गया…पढ़िए- चौंकाने वाली इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट…

सबसे पहले मजदूर से ‘फैमिली ऑफ ठग्स’ बनने की कहानी
4 अक्टूबर को हुई CBI की रेड का पता लगने पर भास्कर टीम राजसमंद पहुंची। पता लगा कि राजसमंद के कांकरोली में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी मकान नंबर 21 में रहने वाला घमेर सिंह देवड़ा एक टायर फैक्ट्री में वर्कर की जॉब करता था। पड़ोस के लोगों ने बताया कि करीब 10 साल पहले उसने ये नौकरी छोड़ दी। इस दौरान उसके B.Com पास छोटे बेटे कमल सिंह ने फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका में बैठे लोगों के साथ ठगी का काम शुरू किया।

परिवार के लोग घर में ही कॉल सेंटर चलाने लगे। सामान्य जीवन जीने वाला परिवार कुछ ही सालों में करोड़पति और फिर अरबपति हो गया। आधा दर्जन लग्जरी कारें, पॉश कॉलोनी में करोड़ों के प्लॉट के मालिक बनते देख देवड़ा फैमिली आस-पड़ोस के लोगों की रडार पर तो थी, लेकिन किसी को इस बात की भनक नहीं थी कि वे काम क्या करते हैं।

कमल सिंह उर्फ बॉब जहां से बैठकर विदेशियों को ठगी के लिए कॉल करता था, उसका पूरा सेटअप उसने अमलोई में बनास नदी के पार एक जंगल नुमा सुनसान इलाके में कर रखा था। इस जंगल में ही उसने करोड़ों की जमीन खरीदकर एक हाई सिक्योरिटी आलीशान महल खड़ा कर दिया था, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

बहती बनास नदी पार कर फॉर्म हाउस पहुंची भास्कर टीम
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से पड़ताल के बाद दूसरा बड़ा चैलेंज बॉब के अमलोई स्थित फार्म हाउस पहुंचना था। कांकरोली से करीब 12 किलोमीटर दूर अमलोई गांव पड़ता है। कच्चे उबड-खाबड़ रास्तों से टीम बनास नदी के किनारे पहुंची। बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव तेज था, लेकिन बहती नदी के बीच पथरीले रास्ते से ही नदी पार कर रिपोर्टर अमलोई के करीब पहुंचे।

उसने रास्ता बताया कि पहाड़ी के किनारे सुनसान रास्ता जाता है। उसी पर चले जाओ। दो किलोमीटर दूर से ही फार्म हाउस में बना आलीशान महल दिखाई देने लगा, लेकिन फार्म हाउस के बाहर करीब 10 फीट ऊंचाई तक तार बंदी और उसके बाद उतनी ही बड़ी दीवार बना रखी है। गेट के बाहर सिक्योरिटी गार्ड की तैनाती।

बॉब का सेफ हाउस, 3 लेयर सिक्योरिटी
अमलोई गांव में लोगों से बातचीत में पता लगा कि कमल सिंह देवड़ा ने करीब आठ साल पहले 18 बीघा जमीन खरीदी थी। पुलिस की रेड से बचने के लिए उसने नदी के किनारे ही अपना सेफ हाउस बनाया, ताकि वहां तक कोई आसानी से नहीं पहुंच सके। उसके महलनुमा फार्म हाउस में विलासिता की सारी चीजें मौजूद थीं।

इस ठिकाने पर कमल ने कॉल सेंटर चलाने के लिए हाई स्पीड इंटरनेट का एक टॉवर और लैपटॉप का पूरा सेटअप लगाया। फार्म हाउस के बाहर तीन लेयर की सिक्योरिटी के लिए पहले तारबंदी और उसके बाद बड़ी दीवार और फिर पर्सनल गार्ड को तैनात किया। ताकि आसानी से कोई पता नहीं लगा सके कि फार्म हाउस के अंदर क्या चल रहा है। अगर पुलिस भी छापा मारे तो इतनी सिक्योरिटी के कारण आसानी से अंदर नहीं आ सके। वहीं बाहर की हर एक्टिविटी को मॉनिटर करने के लिए गेट के बाहर और अंदर 10 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे।

फार्म हाउस में घोड़े, स्विमिंग पूल
हम गांव में बात करने के बाद फार्म हाउस के बाहर पहुंचे तो देखकर हैरान रह गए। गाड़ी से उतर कर आगे बढ़े तो कुछ महिलाएं जंगल में गाय-भैसों को चराते हुए मिलीं। उनसे पूछा तो बोलीं कि उनकी आंखों के सामने इस महल को बनाने में दो साल से ज्यादा समय लग गया।

कमल सिंह ने फार्म हाउस को इस तरीके से बनवाया कि यहां कॉल सेंटर और मौज दोनों ही कर सके। फार्म हाउस में तीन से चार घोड़े भी रखे हुए हैं। इसके साथ ही स्विमिंग पूल, खेलने के लिए ग्राउंड, टेनिस कोर्ट, जिम जैसी सारी सुविधाएं बना रखी हैं। इस फार्म हाउस में करीब आधा दर्जन लग्जरी गाड़ियां भी पार्क कर रखी थीं।

दो साल पहले का खुलासा: सॉफ्टवेयर से करते थे इंटरनेट कॉल
जिस कमल सिंह उर्फ बॉब को CBI ने 4 अक्टूबर को पकड़ा उसके खिलाफ एटीएस, एसओजी ने 19 मार्च 2020 को भी कार्रवाई की थी। तब राजसमंद के हाउसिंग बोर्ड स्थित कमल सिंह के मकान नंबर-21 पर छापा मारा था। इस दौरान पुलिस को करीब 9 लैपटॉप, अमेरिकन लोगों की कॉन्टैक्ट लिस्ट मिली थी। पुलिस ने कमल सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।

तब पूछताछ में कमल सिंह देवड़ा ने पहली बार ठगी के इस मायाजाल का खुलासा किया था। उसने बताया कि eyebeam/crm सॉफ्टवेयर से वह अमेरिकन लोगों को इंटरनेशनल कॉल करता था। इसके बाद उन पर संदिग्ध गतिविधियां जैसे ट्रैफिक रूल्स तोड़ना, चेक बाउंस, ड्रग लेने के आरोप लगाकर सोशल सिक्योरिटी नंबर ब्लॉक या सस्पेंड करने की धमकी देते थे।

ऐसे में वे हमें कार्रवाई नहीं करने की रिक्वेस्ट करते, तब उन्हें इसकी एवज में गिफ्ट वाउचर खरीदकर देने के लिए कहते थे। वाउचर स्क्रैच कर वो हमें नंबर भेजते थे। इन स्क्रैच नंबर को हम ऑनलाइन वेबसाइट को 40 से 50 प्रतिशत के कमीशन में बेच देते थे। फिर मनी एक्सचेंज पर यह पैसा कैश निकलवा लेते थे।

फैमिली को सिखाई अमेरिकन इंग्लिश
नाम नहीं छापने की शर्त पर सीबीआई के अधिकारी ने बताया कि इस कार्रवाई के तीन-चार महीने में ही कमल जमानत पर बाहर आ गया। फिर से नया सेटअप तैयार किया, लेकिन इस बार उसने इस काम में अपने परिवार को झोंक दिया।

अपने 10वीं पास भाई भवानी, कभी फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले घमेर सिंह को अमेरिकन एक्सेंट में अंग्रेजी बोलना सिखाया। कुछ महीनों की ट्रेनिंग में फैमिली के कई मेंबर्स ने विदेशियों को ठगने के लिए गिनी चुनी लाइनें सीखीं। इसके बाद अमलोई स्थित अपने सेफ हाउस से ही बॉब फिर से अमेरिकी, कैनेडियन, ऑस्ट्रेलियन लोगों को अपना शिकार बनाने लगा।

अब आपको बताते हैं इंडिया में बैठकर कैसे अमेरिकियों से ठगी करते हैं ये गिरोह……..

अमेरिका के लोगों का डाटा खरीदते हैं

ठगी के लिए गिरोह सबसे पहले अमेरिका और अन्य देशों के लोगों का डेटा खरीदता है। इसमें लोगों के नाम, उनका एड्रेस, मोबाइल नंबर, उनके बैंक खाते और इंश्योरेंस पॉलिसी, जॉब प्रोफाइल से लेकर उनके पर्सनल लोन, फैमिली डिटेल होती है। इसके बाद यह लिस्ट फर्जी, लेकिन ट्रेंड एग्जीक्यूटिव को दी जाती है। तब उन नंबरों पर इंटरनेट कॉल कर फंसाया जाता है। पहले उन्हें डिटेल बताते हैं, जिससे उन्हें विश्वास हो जाता है कि ये फेक कॉल नहीं है।

कॉल सेंटर से होती है ठगी

गिरोह ठगी के लिए फर्जी कॉल सेंटर खोलते हैं। यहां बेरोजगार युवाओं को नौकरी पर रखा जाता है। उन्हें 30 से 35 हजार रुपए की सैलरी और हर ठगी पर 2 से 5 डॉलर का इंसेंटिव का लालच दिया जाता है। अमेरिकन एक्सेंट में बात करना सिखाते हैं। करीब 30 सवाल और उनके जवाब की स्क्रिप्ट याद करने की ट्रेनिंग दी जाती है।

डायलर : कॉल सेंटर से सबसे पहले अमेरिका में बैठे शख्स को फोन लगाते हैं। खुद को IRS (इंटरनल रेवेन्यू सर्विस) या SSN (सोशल सिक्योरिटी नंबर) अधिकारी बताते हैं। यह अमेरिकन को बोलता है कि आपने टैक्स टाइम पर नहीं भरा है, अब आपको हजारों डॉलर की पैनल्टी देनी होगी। यह लोग धमकी भरे लहजे में बात करते हैं। डर जाने के बाद कुछ ही डॉलर का भुगतान कर मामला निपटाने का ऑफर देते हैं। इसके लिए सीनियर ऑफिसर से बात करवाने का कहकर कॉल क्लोजर को ट्रांसफर करते हैं।

क्लोजर: अमेरिकन शख्स से बात करके डील को क्लोज करने का जिम्मा होता है। क्लोजर अपने आप को फर्जी अधिकारी बताकर कहता है कि आपको हजारों डॉलर की पेनल्टी से बचना है तो कुछ डॉलर का भुगतान कर दो। इसके बाद उन्हें फाइल क्लोज करने का झांसा देकर ऑनलाइन गिफ्ट वाउचर देने के लिए कहते है। अमेरिकन से ईबे, अमेजन के गिफ्ट वाउचर के नंबर लेकर यह कैश अपने खाते में जमा करवा लेते हैं।

SSN कार्ड ब्लॉक करने की धमकियां देते
इंडिया में आधार कार्ड की तरह अमेरिका में नागरिकों को एसएसएन(सोशल सिक्योरिटी नंबर) कार्ड दिया जाता है। अमेरिका की सरकारी योजनाएं इसी कार्ड से लिंक होती हैं। गिरोह फर्जी एसएसएन डिपार्टमेंट ऑफिसर बनकर कॉल करते हैं। चेक बाउंस, ट्रैफिक रूल्स तोड़ने, साइबर क्राइम करने का आरोप लगाकर उनका सोशल सिक्योरिटी कार्ड ब्लॉक करने की धमकी देते हैं।

टेक्निकल हेल्प के बहाने ठगी
कॉल सेंटर से अमेरिका व कनाडा के लोगों को तकनीकी सहायता देने के लिए संपर्क करते हैं। जिसमें कई तरह के एंटी वायरस इंस्टॉल करने व अन्य सहायता के लिए पॉपअप भेजते हैं। सामने वाला जैसे ही पॉपअप पर क्लिक करता है, कंप्यूटर हैक कर लेते हैं और फिर मदद के नाम पर 200 से 500 डॉलर ठग लेते हैं।

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2. मोबाइल चार्जर के जरिए चुराए जा सकते हैं आपके पैसे

जूस जैकिंग का खेल केवल आपके बैंक अकाउंट से पैसे चोरी करने तक ही सीमित नहीं है। इससे आपका हर तरह का डेटा चोरी हो सकता है। पर्सनल फोटो और वीडियोज तक चुराए जा सकते हैं। राजस्थान में भी लोग जूस जैकिंग के शिकार हो रहे हैं… बीते दिनों ऐसा ही एक केस सामने आया, जिसमें एक महिला के पर्सनल वीडियोज चुराकर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा।(पढ़िए, पूरी खबर)

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