मंत्री ने चैंबर से हटा दी मुखिया की फोटो: महिला IAS की फील्ड पोस्टिंग के लिए लॉबिंग; दुखी मिनिस्टर तोड़ सकते हैं चुप्पी



जयपुर37 मिनट पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

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सत्ताधारी पार्टी के भीतर चल रहे सियासी घमासान के नित नए समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। कभी प्रदेश के मुखिया के मुरीद रहे एक मंत्री का लंबे समय से मोह भंग है। मोह भंग वाले मंत्री की निगाह एक दिन सचिवालय के चैंबर में लगी फोटो पर पड़ी।

मंत्रीजी ने तत्काल स्टाफ से उस फोटो को हटवा दिया। फोटो और किसी का नहीं, प्रदेश के मुखिया का था। चैंबर में उस वक्त मंत्रीजी के जानकार लोग थे, उनमें से किसी ने इसका कारण पूछा तो जवाब दिलचस्प था।

मंत्री ने तर्क दिया कि स्वर्गीय लोगों के बीच जिंदा नेता की फोटो मैच नहीं करती। वैसे इसका कारण कुछ अलग है, लेकिन सियासी जानकार इस घटना के मायने समझ गए हैं।

बड़े लैंड अलॉटमेंट में गड़बड़ी की बू

सरकार में लैंड अलॉटमेंंट, माइंस अलॉटमेंट से लेकर बड़े ठेकों को लेकर व्हीसल ब्लोअर इन दिनों एक्टिव हैं। लैंड अलॉटमेंट से जुड़ी मंत्रियों की कमेटी ने पिछले दिनों दिल्ली रोड पर एक एक संस्था को डीएलसी रेट पर बहुत बड़ी जमीन अलॉट करने की सिफारिश की है।

व्हीसल बलोअर्स ने इसमें गड़बड़ी के बिंदुओं को लेकर कई मंत्रियों के यहां दस्तावेज पहुुंचाए और इस पर सवाल उठाए। जिस संस्था को जमीन दी] उस पर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। लैंड अलॉटमेंट से जुड़ी मंत्रियों की कमेटी में शामिल कुछ मंत्री भी इससे सहमत नहीं बताए जा रहे।

कुछ मंत्रियों की चिंता इस बात को लेकर है कि आगे अगर जांच हुई तो बात उन तक आएगी। सत्ताधारी पार्टी के भीतर इस लैंड अलॉटमेंट की खूब चर्चा हो रही है।

गाइडलाइन क्यों हुई साइडलाइन ?

प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी में कभी स्थायी शांति नहीं रह सकती। सियासी बवाल के बाद बयानबाजी नहीं करने की गाइडलाइन को अब साइडलाइन कर दिया गया है।

पहले युवा नेता चुप थे, लेकिन अब उनकी तरफ से भी मोर्चा खुल गया है। युवा नेता के बयान पर जब नेताओं ने गाइडलाइन का पालन करने हवाला दिया तो समर्थक पुराने बयान निकाल लाए। दरअसल, प्रदेश के बड़े नेता गाइडलाइन के तीसरे ही दिन तंज वाले बयानों की शुरुआत कर चुके थे, बाद में तो कई बार तंज भरे बयान आए। अब युवा नेता के मैदान में आने से आगे का रास्ता खुल गया है।

खास मंत्री का दुख, अब चुप्पी टूटने का इंतजार

सियासी सीन से चिर उदासीन रहने वाले एक मंत्री इन दिनों अंदर ही अंदर भारी परेशान हैं। मंत्री सत्ता के सबसे नजदीक माने जाते रहे हैं। पब्लिक पर्सेप्शन भी शुरू से यही बना हुआ है। पिछले दिनों कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जो विपक्ष में रहते हुए भी नहीं हुई थीं। मंत्री के नजदीकियों पर गाज गिर गई।

कार्यकर्ताओं के कंस्ट्रक्शन टूट गए। इस मामले को सत्ता के बड़े घर तक भी पहुंचाया, लेकिन तब तक बनी हुईं चीजें टूट चुकी थीं। मतलब साधारण से मामलों में अपनी ही सरकार में जब नहीं चले तो सत्ता केंद्र के प्रति नाराजगी स्वाभाविक है।

मंत्रीजी ने कुछ साथियों से अपनी पीड़ा शेयर की तो वहां से भी ऐसे कई दुख भरे किस्से सामने आ गए। अब बिना बोले और बिना ताकत दिखाए सत्ता केंद्र कभी झुकते नहीं, मंत्रीजी ने चिर चुप्पी धारण कर रखी है। अब मंत्री की चुप्पी टूटने का इंतजार है, वैसे सब्र का पैमाना कैबिनेट बैठक में एक बार छलक चुका है।

महिला आईएएस की फील्ड पोस्टिंग के लिए लॉबिंग

बड़े अफसरों की पोस्टिंग और विभाग बहुत मायने रखते हैं। मनचाही पोस्टिंग नहीं मिले तो नई जगह ज्वाइन नहीं करने का आजमाया हुआ फार्मूला है। एक महिला आईएएस को राजधानी मेंं एक विभाग में किया गया तबादला रास नहीं आया।

पिछले दिनों आई तबादला सूची में ही एनसीआर इलाके से उनका ट्रांसफर हुआ था। महिला आईएएस की रुचि सचिवालय की जगह फील्ड पोस्टिंग में है। आने वाले दिनों में अब उन्हें फील्ड पोस्टिंग का इंतजार है, सियासी लॉबिंग पूरी हो चुकी है।

क्रांतिकारी आईएएस पांच साल बाद फिर वहीं लौटे

एक क्रांतिकारी स्वभाव के आईएएस अफसर का तबादला जितना चर्चा में रहा, उतना ही दिलचस्प संयोग उनकी नई पोस्टिंग से जुड़ गया है। जिस भी विभाग में रहे, वे अपना पॉइंट ऑफ व्यू बेबाकी से रखते हैं, बस इसी से विवाद हो जाता है और उन्हें विभाग से जाना पड़ता है।

चर्चित निगम में भी विवाद के बाद उन्हें तबादला करके अब वापस सचिवालय में ही भेजा गया है। नई जगह वही है, जिस पोस्ट पर पांच साल पहले थे। इसे बर्फ वाला विभाग माना जाता है, उपर से पोस्ट भी वही। इन सबके बावजूद मनोबल डाउन बिल्कुल नहीं हें। नई जगह आजकल वे चैंबर की साज सज्जा पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी

वॉइस ओवर: प्रोड्यूसर राहुल बंसल

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