बूंदी में मनाया घासभैरू महोत्सव: बैलों की जोड़ी से निकाली सवारी, हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन



बूंदी14 मिनट पहले

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भाई दूज पर हर साल की तरह हिंडोली, ठीकरदा, बड़ौदिया, सथूर, बोरखेड़ा सहित आस-पास के कस्बों में लोक सांस्कृतिक पर्व घासभैरू महोत्सव मनाया गया।

बूंदी में भाई दूज पर हर साल की तरह हिंडोली, ठीकरदा, बड़ौदिया, सथूर, बोरखेड़ा सहित आस-पास के कस्बों में लोक सांस्कृतिक पर्व घासभैरू महोत्सव मनाया गया। इसमें लोक संस्कृति को बनाए रखने के लिए ग्रामीणों ने घास भैरू की सवारी को बैलों की जोड़ी से निकाली घास भैरू की सवारी में ग्रामीणों ने उत्साह से भाग लिया।

बूंदी में भाई दूज पर हर साल की तरह हिंडोली, ठीकरदा, बड़ौदिया, सथूर, बोरखेड़ा सहित आस-पास के कस्बों में लोक सांस्कृतिक पर्व घासभैरू महोत्सव मनाया गया।

बूंदी में भाई दूज पर हर साल की तरह हिंडोली, ठीकरदा, बड़ौदिया, सथूर, बोरखेड़ा सहित आस-पास के कस्बों में लोक सांस्कृतिक पर्व घासभैरू महोत्सव मनाया गया।

इस दौरान ग्रामीणों ने आकर्षक झांकिया बनाई व हैरतअंगेज जादूगरी के नजारे पेश किए। अजीब तरह के स्वांग रचाकर लोगों का मनोरंजन किया गया। कोई फांसी पर लटका हुआ था तो कोई कांटों पर सोया हुआ दिखाई दिया। जादूगरी के नजारों को देखने के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। घासभैरू उत्सव के दौरान कुछ अलग तरह की दुनियां देखने को मिली। हर कोई अपनी मस्ती में मग्न दिखाई दिया। बड़ौदिया व हिण्डोली में घास भैरू महोत्सव पर स्थानीय कलाकारों ने कई हैरत अंगेज करतबों का प्रदर्शन किया। करतबों को देख लोग अचंभित रह गए और ग्रामीणों के करतबों की प्रशंसा की।

महोत्सव में करतबों को देख लोग अचंभित रह गए और ग्रामीणों के करतबों की प्रशंसा की।

महोत्सव में करतबों को देख लोग अचंभित रह गए और ग्रामीणों के करतबों की प्रशंसा की।

इन करतबों में पानी में तैरती पट्टी, कच्चे धागे पर लटके भारी भरकम चक्की के पाटे, लोहे के पाइप पर बिना पकड़े हुए बाइक का खड़ा रहना, खेल पर बंद बाइक का पहिया घूमते हुए, कांच के टुकड़े पर नृत्य करता युवक, घूमती महादेव की झांकी से पानी का निकलना, कांच पर पुरानी गाड़ी का टिका रहना आदि शामिल रहे। जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने भी बड़ौदिया पहुंचकर जादुई करतबों को देखा और सराहा।

सरपंच राधेश्याम गुप्ता ने जिला कलेक्टर का साफा बंधवाकर स्वागत किया। इस अवसर पर जिला कलेक्टर ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राचीन परम्पराओं को जीवंत रखने से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। ग्राम पंचायत की ओर से ग्रामीणों के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई थी। पुलिस का माकूल बंदोबस्त भी रहा। इसी तरह आस पास के गांवों के ग्रामीणों के साथ बड़ी संख्या में बून्दी, कोटा व टोंक के लोग भी घास भैरू महोत्सव पर हैरतअंगेज करतबों को देखने पहुंचे।

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