पिता-भाइयों को मार हत्यारों ने खून से तिलक किया: भरतपुर हत्याकांड में बचे घर के इकलौते पुरुष ने बताया- बचाना दूर, लोग घरों में दुबक गए



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जयपुर/भरतपुरएक घंटा पहलेलेखक: मनीष व्यास

‘साहब, मोहन और उसके बेटों ने मेरे पिता और दो भाइयों की दिनदहाड़े सरे बाजार हत्या कर दी। उनके खून से अपने माथे पर तिलक लगाए। मुझे भी बहुत मारा। लाठियों के वार से मेरा सिर फोड़ दिया। मैं जैसे-तैसे बचकर भागा और एक गली में जाकर दुबक गया नहीं तो वो मुझे भी मार देते।’

‘मेरी आंखों के सामने उन्होंने मेरे पिता और भाइयों को शरीर और चेहरे में सरिये घुसा-घुसा कर मार दिया और मैं कुछ नहीं कर सका। बाजार में सब अपने घरों और दुकानों में दुबक गए। किसी ने बचाने की कोशिश नहीं की।’

दर्द की ये दास्तां है- हाल ही में भरतपुर के पथैना हत्याकांड में पीड़ित परिवार से जिंदा बचे इकलौते मर्द यदुराज की। दैनिक भास्कर से अपनी आपबीती शेयर करते हुए उसने जो बताया, वो सहमा देने वाला था।

इस तरह हुई विवाद की शुरुआत
भरतपुर से जयपुर-आगरा रोड पर 45 किलोमीटर दूर है पथैना गांव। आबादी 10 हजार से ज्यादा है। यदुराज ने बताया, वह जिला पुलिस स्पेशल टीम में कॉन्स्टेबल है। पत्नी भी हाल ही में थर्ड ग्रेड टीचर बनी।

बड़ा भाई हेमू पथैना में ही घर पर ही रहकर जमींदारी करता और छोटा भाई किशन RAC में पोस्टेड था। एक छोटी बहन है, जो पढ़ रही है। डेढ़ महीने पहले उसका बड़ा भाई हेमू और छोटी बहन गांव से बाहर आगरा-जयपुर हाइवे पर खेड़ली मोड़ पर खड़े थे। वहां गांव के ही रहने वाले मोहन सिंह के नाबालिग बेटा उसकी बहन को लगातार घूरे जा रहा था। इससे वहां हेमू और नाबालिग में लड़ाई हो गई। हेमू ने नाबालिग को पीट दिया था।

पिटाई का बदला लेना चाहता था मोहन सिंह का परिवार
यदुराज ने बताया कि कुछ दिनों पहले किशन छुटियों में गांव आया हुआ था। वो अपने दोस्त को छोड़ने बाहर गया हुआ था। वहां इन लोगों ने उस पर घेरकर हमला बोल दिया। वो जैसे तैसे जान बचाकर भागते हुए घर पहुंचा था। उसने घर आकर सभी को ये बात बताई। हमने फिर भी कुछ नहीं किया।

सबसे पहले किशन पर किया हमला
यदुराज ने बताया, 13 अक्टूबर को उसका भाई किशन(24) कपड़े लेने खेड़ली मोड़ पर गया हुआ था। वहां से जब वो वापस लौट रहा था तो सत्येंद्र और उसके भाइयों ने उसे घेर लिया और हमला बोल दिया।

मारपीट से बचते-बचाते किशन घर पहुंचा और पिता विजेंद्र सिंह(50) और भाई हेमू (28) को ये बात बताई। इस बार उन्होंने भी तय कर लिया था कि अब मोहन सिंह से आमने-सामने ही पूछ लेते है कि ये रोज-रोज का माजरा क्या है? वो क्या चाहते है? और नाराजगी के साथ बाज़ार की तरफ निकल गए।

किसी ने बताया- तेरे पापा और भाइयों को मार रहे हैं

यदुराज ने बताया, वो घर पर ही था, तभी किसी ने चिल्लाते हुए बताया कि तेरे पापा और भाइयों को मोहन सिंह और उसके बेटे बाज़ार में बुरी तरह से मार रहे है। ये सुनते ही मैं तुरंत दौड़कर उधर भागा।

वहां पहुंचा तो देखा कि वो सभी मिलकर मेरे पापा विजेंद्र सिंह और भाइयों हेमू और किशन को नीचे पटककर उनके सिर और चेहरे पर लाठी-सरियों से बुरी तरह से वार कर रहे थे। उनकी आंखों और मुंह में सरिये घुसा दिए थे। मैं बचाने गया तो मेरे भी सिर पर लाठी-सरियों के वार किए।

मैं घबरा गया और भागकर एक गली में दुबक गया। मोहन सिंह के बेटों ने मेरे पिता और भाइयों के खून से अपने माथे पर तिलक भी लगाए। ये सब में देखता रहा और कुछ नहीं कर सका। वहां मौजूद किसी भी शख्स उन्हें नहीं बचाया। सब घरों-दुकानों में दुबक गए।

इस दौरान हुई फायरिंग में गोली लगने से मोहन सिंह का बेटा धर्मेंद्र भी घायल हो गया था। फिलहाल पुलिस ने 7 नामजद आरोपियों में से 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं बाकी आरोपी अभी फरार चल रहे हैं।

घर में अकेला मर्द बचा है
यदुराज ने बताया कि इस घटना में उसके पिता विजेंद्र सिंह और दो भाइयों हेमू और किशन की ह्त्या होने के बाद अब वो अकेला मर्द ही घर में बचा है। उसकी तो पूरी दुनिया ही उजड़ गई है। मां- भाभी और छोटे भाई की पत्नी बेवा हो गईं। बड़े भाई के दो छोटे बच्चे हैं। ये सब सोचता हूं तो अंदर से हिल जाता हूं। हमने किसी का बुरा नहीं किया था और पढ़ लिख कर परिवार को सक्षम बना रहे थे। हमारे साथ ईश्वर ने ये क्या अन्याय कर दिया?

मोहन सिंह बोला था- मेरे बेटों ने लाठियों से मार डाला
इस घटना के बाद मोहन सिंह ने कहा था कि उसके बच्चों में विजेंद्र के बच्चों से पुरानी रंजिश थी। किशन ने 1 महीने पहले मेरे छोटे बेटे की पिटाई कर दी थी। गुरुवार को बाजार में बड़े बेटे धर्मेंद्र को भी पीट दिया था। उन लोगों के पास बंदूक थी, तो उन्होंने गोलियां भी चलानी शुरू कर दी थी। मेरे बच्चों के पास न तो बंदूक थी और न गोलियां। मैं भगवान की कसम खाकर कह रहा हूं…मेरे बच्चों ने तो उन्हें लट्‌ठ से मार दिया।

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