नेपाल की शातिर महिला डकैत, निशाने पर बड़े बिजनेसमैन: 10 करोड़ का सामान लूटने  के बाद भागने के लिए खरीदी थी कार



जोधपुर13 मिनट पहले

नेपाली नौकरों ने जोधपुर में 10 करोड़ की डकैती की वारदात को अंजाम दिया। 6 नवंबर से लेकर 13 नवंबर तक चली इन्वेस्टिगेशन में पुलिस ने सोने और डायमंड की ज्वेलरी समेत गोल्ड प्लैटिनम के बर्तन के साथ एक तिजोरी भी बरामद कर ली है। मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इस डकैती का खुलासा तो हो गया, लेकिन इस वारदात से जुड़े कई सवाल अब भी बाकी हैं।

क्या जोधपुर से पहले ऐसी वारदात कर चुके थे?

पुलिस को आरोपियों का कुचामन और नेपाल कनेक्शन कैसे मिला? नेपाली नौकरों की ये गैंग कैसे प्लान करती थी?

भारी-भरकम तिजोरी में आखिर था क्या?

मामले की जांच कर रहीं जोधपुर डीसीपी अमृता दुहन ने बताई 11 दिनों की पड़ताल में हुए खुलासे

इस डकैती की मास्टरमाइंड है मंजू उर्फ पूजा। शातिर नौकरानी मंजू की यह पहली वारदात नहीं है। इससे पहले उसकी गैंग हरियाणा, बेंगलुरु, राजकोट और गुड़गांव में भी ऐसी वारदात को अंजाम दे चुके हैं। इन शहरों में भी मंजू ने बड़े बिजनेसमैन की फैमिली को निशाना बनाया। हर बार वारदात के बाद वह नेपाल फरार हो गई। यही कारण रहा कि मंजू आज दिन तक गिरफ्तार नहीं हुई।

मंजू का असली नाम पूजा है, वह नेपाल के कैलाली की रहने वाली है। हैंडीक्राफ्ट बिजनेसमैन अशोक चोपड़ा के यहां पहले काम कर चुके नौकर मंजिल ने जब उनके आलिशान घर और लाइफ स्टाइल के बारे में बताया तो मंजू ने ही इसका प्लान तैयार किया था। 5-6 नवंबर को डकैती से पहले खाने में मिलाकर कौन सा और कितना ड्रग्स देना है ये भी मंजू पहले तय कर चुकी थी और सब कुछ उसी के प्लान के मुताबिक हो रहा था।

जोधपुर से पहले दूसरे शहरों में भी ऐसे ही वारदात को अंजाम दे चुके थे। तरीका वैसा ही था करोड़ों रुपए का सामान चोरी करते और नेपाल भाग जाते। जब आरोपियों को पता चला कि अशोक चोपड़ा के यहां काफी कीमती सामान है तो नेपाल से भी 4 लोगों को बुलाया और इस प्लान में शामिल किया।

पुलिस ने जब इस मामले को इन्वेस्टिगेट करना शुरू किया तो 3 अहम सबूत हाथ लगे

  1. टोल मैसेज
  2. विजिटिंग कार्ड
  3. ऑनलाइन ट्रांजैक्शन…इन्हीं तीन सबूतों के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची।

एक मैसेज ने बताई आरोपियों की पहली लोकेशन

डीसीपी अमृता दुहन ने बताया 5-6 नवंबर की रात लूट के बाद सुबह जब इसकी सूचना मिली तो टीम मौके पर पहुंची। पहली बार में ही क्लीयर हो गया था कि आरोपी नेपाल भागने की कोशिश करेंगे। पूरी टीम को अलर्ट किया और सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए।

अशोक चोपड़ा बेहोशी के हालात में थे। इसी बीच एक अहम सुराग मिला और वो था टोल का मैसेज। अशोक चोपड़ा के मोबाइल पर नागौर के एक टोल से रुपए कटने का मैसेज आया। इनपुट मिलते ही नागौर टीम को अलर्ट किया। शाम होते-होते कुचामन सिटी से इनपुट मिला कि एक कार, कुछ कीमती सामान और एक तिजोरी मिली है।

विजिटिंग कार्ड और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से मिला पहला क्लू

कुचामन पुलिस को तिजोरी के पास कपड़ों का बैग मिला। उसे खंगाला तो एक कबाड़ी की दुकान का विजिटिंग था। पुलिस कबाड़ी की दुकान तक पहुंची तो पता चला कि आरोपी कार खरीदने आए थे। यहां से कुचामन की गैस एजेंसी में काम करने वाले अमर सिंह के बारे में पहली कड़ी मिली।

पुलिस अमर सिंह तक पहुंची तो उसके पास अशोक चोपड़ा के घर से चुराए जेवरात के साथ गोल्ड प्लैटिनम बर्तन मिले। जिसे वे एल्युमिनियम का समझ छोड़कर चले गए थे। पुलिस ने अमर सिंह से पूछताछ की तो बताया कि मंजू और लक्ष्मी ने दो गुट यहां बनाए थे।

एक गुट मंजू का था जो सीधे कार खरीद कुचामन से दिल्ली गया और वहां से नेपाल की तरफ। दूसरा गुट लक्ष्मी का था, जो जयपुर से दिल्ली के लिए निकले। अमर सिंह ने ही बताया कि उनका दिल्ली से नेपाल भागने का प्लान है।

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन

आरोपियों के नेपाल भागने की सूचना मिलते ही एक टीम जयपुर और एक दिल्ली के लिए रवाना की। डीसीपी ने बताया कि वारदात के दिन तीन लोग जयपुर से टैक्सी लेकर जोधपुर आए थे। टैक्सी वाले को पेमेंट दिल्ली के एक व्यक्ति ने ऑनलाइन किया था।

इसी नंबर पर लक्ष्मी बार-बार कॉल कर रही थी। सीसीटीवी फुटेज में ये टैक्सी मिली तो इसके ड्राइवर तक पहुंचे। ड्राइवर ने वे नंबर दिए जिससे उसका पेमेंट हुआ था। इन्हीं नंबरों को ट्रेस कर जोधपुर पुलिस गुड़गांव में लक्ष्मी, मंजिल और धन बहादुर तक पहुंची और तीनों को हिरासत में लिया।

जोधपुर जैसी वारदात गुड़गांव में कर चुके थे

डीसीपी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की तो शिंदे नाम के एक आरोपी का भी नाम सामने आया है। शिंदे की पत्नी हिसार में ऐसी ही वारदात में जेल काट रही है। उन्होंने बताया कि ये आरोपी अलग-अलग शहरों में वांटेड हैं। जोधपुर से पहले गुड़गांव में भी ऐसी वारदात कर चुके थे। इसकी भी मास्टरमाइंड मंजू ही थी। डीसीपी ने बताया कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कई केस सामने आ रहे हैं। इनकी इन्वेस्टिगेशन चल रही है।

डकैतों की एजेंसी, पहले काम ढूंढते फिर वारदात

सभी आरोपी दिल्ली की खेम एजेंसी से नौकरी पर लगे थे। जोधपुर पुलिस ने जब इस एजेंसी का रिकॉर्ड खंगाला तो इस एजेंसी का भी क्राइम रिकॉर्ड मिला। सामने आया कि एजेंसी में शामिल अधिकांश डकैत थे। खेम एजेंसी नौकरों को पहले बड़े बिजनेसमैन के यहां काम के लिए भेजती। यहां वे इनका घर और परिवार देख वारदात का प्लान बनाते। पुलिस की जांच में नौकर मंजू व भगत का भी क्रिमिनल रिकॉर्ड मिला है। मंजू का असली नाम पूजा है और फर्जी आईडी पर भारत में रह रही थी।

लूट नहीं अब डकैती माना जा रहा है

इधर, अब तक पुलिस इस पूरी वारदात को चोरी मान रही थी। लेकिन, डीसीपी ने बताया कि इस वारदात में पांच से ज्यादा लोग शामिल थे। ऐसे में इसे डकैती माना गया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों को इंटरपोल के जरिए नेताल से जोधपुर लाने का प्रोसेस शुरू कर दिया है।

लक्ष्मी दो साल से कर रही नौकरी, वारदात के लिए मंजू को बुलाया

घर में मंजू, मंजिल, लक्ष्मी व धन बहादुर थे। वारदात के दिन 4 लोग भरत, खेम बहादुर, शेर बहादुर आए थे। एक व्यक्ति जोधपुर से ही शामिल हुआ था पुलिस उनका नाम शिंदे बता रही है। वारदात में लक्ष्मी ने सबसे पहले नौकर के रूप में व्यवसायी के घर में घुसी और दो साल से वहां काम कर रही थी।

इस दौरान मंजिल को नौकरी पर लगाया। मंजिल घर की सभी डिटेल लेकर नौकरी छोड़ कर चला गया। उसने सभी डिटेल नेपाल ले जा कर दी। वहां से मंजू उसका बॉयफ्रेंड भरत ने लूट की प्लानिंग की। मंजू उर्फ पूजा ने अगस्त महीने में व्यवसायी के नाती की केयर टेकर के रुप में नौकरी जॉइन की। इसके साथ ही धन बहादुर व मंजिल भी नौकरी जॉइन कर ली। यह सभी खेम बहादुर की जॉब एजेंसी के माध्यम से नौकरी पर लगे।

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