दीपावली पर गोबर से बने दीपक करेंगे घर को रोशन: 21 और 11 दीपकों का मिलेगा सेट, कई जगह भेजे जाएंगे



चूरू5 मिनट पहले

चूरू में कामधेनु दीपावली महायज्ञ मनाने के उद्देश्य को साकार करने के लिए श्रीराजलदेसर गोशाला में गाय के गोबर से दीपक और प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं।

चूरू में कामधेनु दीपावली महायज्ञ मनाने के उद्देश्य को साकार करने के लिए श्रीराजलदेसर गोशाला में गाय के गोबर से दीपक और प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। ईको फ्रेंडली दीपावली की पहल पर गाय के गोबर से बने दीपकों से घर सजकर रोशन होंगे। इस बार करीब ढाई-तीन लाख दीपक और 2100 जोड़ी लक्ष्मी-गणेशजी की मूर्तियां बनाने का लक्ष्य है।

पिछले साल भी गोशाला की ओर से गोबर के एक लाख दीपक और 1100 मूर्तियां तैयार की गई थी। वहीं इनको बेचने के लिए देशभर में कई बड़े शहरों और कस्बों में विभिन्न जगहों पर काउंटर लगाए जाएंगे। जिसमें लागत मूल्य पर दीपक बेचे जाएंगे। इससे पहले जैसलमेर में भी होली में गोबर से बने कंडों का उपयोग किया गया था। इसके साथ ही विभिन्न समाजों में भी गोबर के कंडों का उपयोग दाह संस्कार के लिए किया जाता है।

दीपकों से वातावरण होगा शुद्ध
इस बार दीपावली पर गाय के गोबर से बने दीपकों को प्रज्ज्वलित किया जाएगा। शहर में अधिक से अधिक घर इन दीयों की रोशनी से जगमगाएंगे। वहीं दूसरी ओर गोबर से बने दीपक में घी मिलने से इससे निकलने वाला धुंआ भी वातावरण के लिए बेहद फायदेमंद रहेगा। गोबर से बने दीपक से वातावरण में शुद्धता होगी।

गौ सेवा में खर्च होगी राशि
गौग्राम सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष ललित दाधीच और गोशाला मंत्री मंगतमल पांडिया ने बताया कि दीपक और लक्ष्मी गणेश भगवान की मूर्तियों से बेचने पर होने वाली आय को गोशाला में गौ सेवार्थ के लिए काम में लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दीपकों की कीमत अलग-अलग है। जिनमें दो, तीन और पांच रुपए कीमत रखी गई है। अभियान के तहत तीन साइज के दीपक तैयार करवाएं जा रहे हैं। वहीं 21 और 11 दीपकों का सेट मिलेगा। इसके साथ ही धूपबत्ती भी उपलब्ध रहेगी।

दीपावली से करीब 2 महीने पहले से यह काम शुरू कर दिया जाता है।

2 महीने पहले शुरू करते हैं काम
गोशाला पदाधिकारियों ने बताया कि लगातार 2 साल से गाय के गोबर से दीपक बनाने का काम किया जा रहा है। हर साल दीपावली से करीब 2 महीने पहले से यह काम शुरू कर दिया जाता है। इस बार 3 व्यक्ति लगातार दीपक और लक्ष्मी गणेश भगवान की प्रतिमा बना रहे हैं। इनको जिले के अलावा देश के हर कोने में भेजने का काम किया जाता है। जिसमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, कलकता, मद्रास, असम, उड़ीसा आदि स्थानों पर भेजे जाते हैं। इनको कोरियर के द्वारा भेज दिया जाता है। जिसमें इनके रुपए खरीदने वाले गोशाला के बैंक खाते में जमा करवा देते है।

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