थानाधिकारी और पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप: जमानत के बाद भी डराया-धमकाया, पीड़ितों ने एसपी से की शिकायत




हनुमानगढ़3 घंटे पहले

गोलूवाला पुलिस थानाधिकारी और स्टाफ के खिलाफ मारपीट करने और अवैध हिरासत में रखकर भद्दी गालियां देने का आरोप लगाते हुए पीड़ितों ने सोमवार को एसपी को ज्ञापन सौंपा।

हनुमानगढ़ जिले की गोलूवाला पुलिस थानाधिकारी और स्टाफ के खिलाफ मारपीट करने और अवैध हिरासत में रखकर भद्दी गालियां देने का मामला सामने आया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेतृत्व में पीड़ितों ने सोमवार को एसपी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में थानाप्रभारी से लेकर कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

पीड़ित विनोद कुमार ने ज्ञापन में बताया कि वो खेती और पेट्रोल पम्प पर काम करता है। वहीं, शंकरलाल सिलाई का कार्य तो पवन कुमार आटा चक्की का कार्य करता है। तीनों पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि वो हिन्दू धार्मिक विचाराधारा के होने के कारण जीवों की रक्षा व गौरक्षक के रूप में जाने जाते हैं। विनोद, शंकरलाल और पवन कुमार ने बताया कि 12 दिसंबर की रात को 9.50 बजे फोन पर एक सूचना मिली कि लाल रंग का ट्रक जो बहुत तेजी और लापरवाही से चल रहा है उसमें अवैध रूप से गौवंश ले जाया जा रहा है। इसी सूचना पर जब उन्हें ट्रक दिखा तो वो तेज भागता हुआ उनकी कार पर चढ़ा देता, लेकिन वो किसी तरह बचे और थाने के आगे जाकर शोर मचाकर नाकाबन्दी करवाई।

एक ट्रक नाकाबंदी होने के कारण रूका, जिसको गोलूवाला थाना के कर्मचारी बिना कोई काईवाई किए छोड़ दिया। आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मी कैलाश नारायण पुलिस, सुरजीत, गुरतेज सिंह, मेजर सिंह अनिल कस्वां शराब के नशे में धुत थे जिन्होंने उनके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान थानाप्रभारी भजनलाल भी आ गए। उन्होंने भी उसके साथ मारपीट की और सभी ने गंदी-गंदी गालियां भी निकाली। विनोद, शंकर और पवन ने आरोप लगाया कि उन्होंने कहा कि आप सभी ने हमारी शराब पार्टी खराब कर दी ओर हमारी कार को भी गलत दस्तावेज बनाकर जब्त कर ली।

विहिप नेता आशीष पारीक ने आरोप लगाया कि 12 दिसम्बर की रात्रि की सीसीटीवी फुटेज औ कॉल डिटेल लेकर सच्चाई पत्रावली पर लेकर निष्पक्ष जांच की जाए तो सब सामने आ जाएगा। पारीक ने कहा कि पुलिस ने जमानत मिलने के बावजूद भी तीनों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से शाम चार बजे तक अवैध हिरासत में रखा ताकि वो मेडिकल इलाज नहीं करवा सकें ओर डराया-धमकाया जा सके। पारीक ने बताया कि पुलिस की मार की वजह से तीनों पीड़ितों को जिला अस्पताल में दो दिन भर्ती रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि पुलिस ने खाली कागजों पर भी हस्ताक्षर करवा रखे हैं, जिनका वो गलत इस्तमाल कर सकते हैं। आशीष पारीक ने कहा कि अगर गोलूवाला पुलिस थानाधिकारी और अन्य पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वो मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

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