ड्रोन से फसलों पर नैनो यूरिया के स्प्रे का ट्राइल: 20 एकड़ खेती पर किया छिड़काव, लोगों के मुकाबले 60 गुना तेजी से काम




टोंक7 घंटे पहले

गेहूं की फसल में नैनो यूरिया का स्प्रे का ट्रायल करने से पहले मौके पर जमा किसान, कृषि विभाग के अफसर।

फसलों में कीटनाशक दवा से लेकर नैनो यूरिया का स्प्रे कितना कारगर है, इसको लेकर बुधवार को 20 एकड़ में ड्रोन का ट्रायल किया गया। यह ट्रायल किसानों, कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया। इसमें प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया कि फसलों में ड्रोन तकनीकी के उपयोग से अधिक पैदावार मिलेगी। यह लोगों के मुकाबले 50-60 गुणा तेजी से छिड़काव करता है, जिससे फसलों का विकास अच्छी तरह से होता है।

सरकार अब किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई तरह के नवाचार कर रही है। इसके लिए सरकार अब फसलों में कीटनाशक दवा और नैनो यूरिया का छिड़काव भी ड्रोन से करवाने का प्लान बना रही है। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत बुधवार से टोंक समेत प्रदेश के सभी जिलों में ड्रोन तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया गया। टोंक में भी गफूरपुरा गांव में गेहूं की फसल पर इसका ट्रायल किया गया। इस दौरान कृषि विभाग के राज्य स्तरीय व जिला स्तरीय अधिकारियों, इफको प्रतिनिधि, कस्टमर हायरिंग सेंटर के संचालक, कृषक उत्पादक संगठन सदस्य, ग्राम सेवा सहकारी समिति के सदस्य एवं प्रगतिशील किसान मौजूद थे।

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक केके मंगल ने बताया कि ड्रोन के माध्यम से स्प्रे का मुख्य लक्ष्य आधुनिकीकरण खेती को बढ़ावा देना, किसानों की कम लागत में आय बढ़ाना और समय की बचत करना है। वर्तमान में किसानों द्वारा अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करने से मृदा की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है। किसानों को इससे बचने के लिए परंपरागत खेती के स्थान पर नई तकनीकी की खेती को अपनाना होगा, जिससे उत्पादन बढ़ने से किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा। मैन्युअल छिड़काव की तुलना में ड्रोन 50-60 गुना तेजी से कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव कर सकता है। अगर ड्रोन खेती के क्षेत्र में सफल रहे तो सरकार किसानों को सब्सिडी पर ड्रोन उपलब्ध कराए जाएंगे।

कृषि आयुक्तालय जयपुर के अतिरिक्त निदेशक त्रिलोक चन्द जोशी ने कहा कि फसलों को स्प्रे करने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग हर प्रकार के हानिकारक प्रभाव को समाप्त करता है साथ ही फसलों के उपचार के लिए ड्रोन छिडकाव को सबसे प्रभावशाली और सुरक्षित माना गया है। इफको के मुख्य क्षेत्र प्रबन्धक अजय गुप्ता ने कहा कि फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए यूरिया सर्वाधिक काम में लेने के कारण कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है। विकल्प के रूप में नैनो यूरिया नैनो तकनीक पर आधारित स्वदेशी उर्वरक है, जो भारत सरकार द्वारा अनुमोदित है। प्रगतिशील कृषक मनिन्द्र सिंह लोदी ने कहा कि नैनो तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होगी। साथ ही किसानों को नई तकनीक से अधिक उत्पादन होगा।

कृषि अधिकारी मिशन श्योजीराम यादव ने बताया जनरल ऐरोनोटिक्स प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी बैंगलोर ड्रोन का प्रदर्शन कम्पनी के रमोट पायलट ड्रोन प्रदर्शन द्वारा सजीव प्रदर्शन किया गया । इस अवसर पर कार्यवाहक सहायक निदेशक कृषि रिपुदमन सिंह राजावत, कृषि अधिकारी कजोड मल गुर्जर, कृषि अधिकारी पौध संरक्षण नन्दराम मीणा, कृषि अनुसंधान अधिकारी अरविन्द कुमार जांगीड,कृषि अधिकारी उद्यान अनिता खंगार आदि मौजूद थे। इस दौरान ड्रोन को देखने के लिए लोगों की काफी भीड़ उमड़ पड़ी।

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