ड्रॉन VIDEO में देखे अजमेर में 7-अजूबे: आनासागर झील के किनारे 10 करोड़ खर्च कर बनाए, रात को लाइटिंग करती अट्रेक्ट



अजमेर24 मिनट पहले

अजमेर की ऐतिहासिक आनासागर झील के किनारे बने विश्व के सेवन वंडर्स का शहरवासियों के साथ ही पर्यटक अजमेर में अब सात अजूबों का दीदार कर रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से उद्घाटन के बाद से ही लोगों की भीड़ देखी जा सकती है। वही, रात में सात अजूबों की रोशनी लोगों के लिए सेल्फी प्वाइंट बना हुआ है। जहां इसकी सुंदरता को दैनिक भास्कर ने ड्रोन कैमरे में कैद किया है।

अजमेर की ऐतिहासिक आनासागर झील के किनारे बने विश्व के सेवन वंडर्स का दीदार अब शहरवासियों के साथ पर्यटक भी कर सकेंगे। कोटा के बाद यह राजस्थान का दूसरा ऐसा स्थान है, जहां आप खुदको दुनिया के साथ आश्च्र्यो के बीच पाएंगे। कोटा में यह पार्क खासा लोकप्रिय हो चुका है। चंबल नदी के किनारे स्थित उस पार्क की खूबसूरत लोकेशन की वजह से वहां फिल्मकारों का ध्यान आकर्षित हुआ और वहां फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया की शूटिंग हो चुकी है। आने वाले समय में अजमेर में भी इसकी संभावना बनी है। सेवेन वंडर्स पार्क में भी फिल्म शूटिंग, एल्बम शूटिंग, प्री वेडिंग शूट का अवसर मिल सकेगा।

भास्कर ने ड्रोन कैमरे से सुंदरता को किया रिकॉर्ड

दैनिक भास्कर ने आनासागर झील के किनारे बनाए गए सात अजूबों को सुबह और शाम को ड्रोन कैमरे से रिकॉर्ड किया है। जिसमें सात अजूबों की सुंदरता को देखा जा सकता है। वही, रात होते ही सात अजूबों की लाइट्स को शुरू कर दिया जाता है। जिसके बाद से इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। वही, सेवन वंडर्स पार्क शुरुआत होने के बाद से ही पर्यटकों की काफी भीड़ भी देखी जा सकती है। लोगों के लिए सेवन वंडर पार्क सेल्फी प्वाइंट बन चुका है।

10 करोड़ की लागत से बनाया

सेवेन वंडर्स को आनासागर झील के किनारे करीब 10 करोड़ की लागत से लगभग 1 हेक्टर जमीन पर तैयार किया गया है। इसमें पेरिस का आइफिल टावर, मिश्र के पिरामिड, पीसा की झुकी हुई मीनार, रोम का कोलोजियम, स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा, आगरा का ताजमहल शामिल है।

सेवन वंडर्स पार्क में बनाया गया है दुनिया में प्रेम की निशानी के रूप में प्रसिद्ध भारत में आगरा स्थित ताजमहल का नमूना। मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। सफेद संगममर से बनी खूबसूरत स्मारक का निर्माण कार्य 1632 ई. में शुरू किया गया जिसे पूरा करने में 15 वर्ष लगे। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के पीछे यमुना नदी बहती है और चारों तरफ आकर्षक उद्यान एवं सवारे इस और भी खूबसूरत बनाते हैं।

सेवन वंडर्स पार्क में आपको मिस्र का पिरामिड भी देखने को मिलेगा। मिस्र में काहिरा के उप नगर गीजा के तीन पिरामिडो में एक ग्रेट पिरामिड जो विश्व के साथ आश्रयो में है, इसकी प्रतिकृति यहां बनाई गई है। इसे मिस्र किस शासक खुफुके चौथी वंश द्वारा अपनी कब्र के रूप में 2560 ईसा पूर्व बनवाया था। करीब 450 फीट ऊंचे एवं 43 सीढ़ियों वाले पिरामिड को बनाने में 23 वर्ष का समय लगा। पिरामिड का आधार 13 एकड़ क्षेत्रफल में बना है।

सेवन वंडर्स पार्क में आपको मिस्र का पिरामिड भी देखने को मिलेगा। मिस्र में काहिरा के उप नगर गीजा के तीन पिरामिडो में एक ग्रेट पिरामिड जो विश्व के साथ आश्रयो में है, इसकी प्रतिकृति यहां बनाई गई है। इसे मिस्र किस शासक खुफुके चौथी वंश द्वारा अपनी कब्र के रूप में 2560 ईसा पूर्व बनवाया था। करीब 450 फीट ऊंचे एवं 43 सीढ़ियों वाले पिरामिड को बनाने में 23 वर्ष का समय लगा। पिरामिड का आधार 13 एकड़ क्षेत्रफल में बना है।

130 वर्ष पुराने पैरिस के एफिल टावर की नींव 26 जनवरी 1887 को शोदे मार्स ने रखी थी। लोहे से बना होने से इसे आयरन लेडी कहा जाता है। एफिल टावर को 300 मीटर ऊंचा होने से दुनिया की सबसे ऊंची रचना का खिताब प्राप्त है। इसके निर्माण में 7300 लोहे का उपयोग किया गया है।

130 वर्ष पुराने पैरिस के एफिल टावर की नींव 26 जनवरी 1887 को शोदे मार्स ने रखी थी। लोहे से बना होने से इसे आयरन लेडी कहा जाता है। एफिल टावर को 300 मीटर ऊंचा होने से दुनिया की सबसे ऊंची रचना का खिताब प्राप्त है। इसके निर्माण में 7300 लोहे का उपयोग किया गया है।

इटली की झुकी हुई पीसा की मीनार 7 मंजिला है। जमीन से जिस तरफ झुकी है 55.86 मीटर तथा ऊपर की तरफ से 56.70 मीटर है। इसका वजन 14.500 मेट्रिक टन है। मीनार का निर्माण 14 अगस्त 1173 ई. में प्रारंभ हुआ एवं 199 वर्ष में 3 चरणों में पूरा हुआ। इसकी प्रतिकृति भी आपको लुभाएगी।

इटली की झुकी हुई पीसा की मीनार 7 मंजिला है। जमीन से जिस तरफ झुकी है 55.86 मीटर तथा ऊपर की तरफ से 56.70 मीटर है। इसका वजन 14.500 मेट्रिक टन है। मीनार का निर्माण 14 अगस्त 1173 ई. में प्रारंभ हुआ एवं 199 वर्ष में 3 चरणों में पूरा हुआ। इसकी प्रतिकृति भी आपको लुभाएगी।

स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी न्यूयॉर्क के हार्बर टापू पर तांबे से बनी है। मूर्ति 151 फीट ऊंची है तथा चौकी एवं आधार को मिलाकर 305 फीट है। मूर्ति एक हाथ को ऊंचा कर जलती मशाल लिए हैं तथा दूसरे हाथ में किताब लिए हैं। इसका पूरा नाम लिबर्टी एंड लाइटनिंग द वर्ल्ड अर्थात स्वतंत्र संसार को शिक्षा प्रदान करती है।

स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी न्यूयॉर्क के हार्बर टापू पर तांबे से बनी है। मूर्ति 151 फीट ऊंची है तथा चौकी एवं आधार को मिलाकर 305 फीट है। मूर्ति एक हाथ को ऊंचा कर जलती मशाल लिए हैं तथा दूसरे हाथ में किताब लिए हैं। इसका पूरा नाम लिबर्टी एंड लाइटनिंग द वर्ल्ड अर्थात स्वतंत्र संसार को शिक्षा प्रदान करती है।

पुराने जमाने में भी खेलों को कितना महत्व दिया जाता था, इसकी बानगी है रोम का कॉलेसियम। सेवन वंडर्स पार्क में प्रवेश करने पर नजर जाती है एक बड़ी सी गोल संरचना पर जिसे कॉलेसियम कहते हैं। यह रोम में बने विशाल खेल स्टेडियम की अनुकृति है। इसे रोम मेंब80वीं ई., में बनवाया गया था जिसमें 50000 लोगों के लिए जगह थी।

पुराने जमाने में भी खेलों को कितना महत्व दिया जाता था, इसकी बानगी है रोम का कॉलेसियम। सेवन वंडर्स पार्क में प्रवेश करने पर नजर जाती है एक बड़ी सी गोल संरचना पर जिसे कॉलेसियम कहते हैं। यह रोम में बने विशाल खेल स्टेडियम की अनुकृति है। इसे रोम मेंब80वीं ई., में बनवाया गया था जिसमें 50000 लोगों के लिए जगह थी।

एक और एफिल टावर तो दूसरी और काइस्ट द रिडीमर की अनुकृति दिखाई पड़ती है। क्राइस्ट द रिडीमर उद्वार करने वाले की प्रतिमा ब्राजील में एक पहाड़ी के ऊपर बनाई गई है। सीमेंट और पत्थर से बनी यह मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति मानी जाती है। मूर्ति की ऊंचाई 130 फीट है एंव 1922 से 1931 के मध्य बनवाया गया।

एक और एफिल टावर तो दूसरी और काइस्ट द रिडीमर की अनुकृति दिखाई पड़ती है। क्राइस्ट द रिडीमर उद्वार करने वाले की प्रतिमा ब्राजील में एक पहाड़ी के ऊपर बनाई गई है। सीमेंट और पत्थर से बनी यह मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति मानी जाती है। मूर्ति की ऊंचाई 130 फीट है एंव 1922 से 1931 के मध्य बनवाया गया।

(ड्रॉन सहयोग-अक्षतसिंह चौधरी)

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