डेल्फिक डायलॉग में शेयर किए अनुभव: पेपरमैन बनकर भारतीय परम्पराओं से जुड़ने का मैसेज देते है चित्रकार विनय शर्मा



जयपुर4 घंटे पहले

डेल्फिक काउंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से कला संवर्धन के प्रयास के तहत आयोजित  ऑनलाइन डेल्फिक डायलॉग्स सीरीज के 35वें सत्र का आयोजन शनिवार को किया गया। 

डेल्फिक काउंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से कला संवर्धन के प्रयास के तहत आयोजित ऑनलाइन डेल्फिक डायलॉग्स सीरीज के 35वें सत्र का आयोजन शनिवार को किया गया। काउंसिल की अध्यक्ष आइएएस श्रेया गुहा ने जानकारी देते हुए कहा की कला और एक लयबद्ध अतीत विषयक सत्र में पेंटर, प्रिंटमेकर और इंस्टॉलेशन आर्टिस्ट विनय शर्मा रूबरू हुए। उन्होंने डीसीआर कोषाध्यक्ष शिप्रा शर्मा के साथ चर्चा की।

काउंसिल की अध्यक्ष आइएएस श्रेया गुहा ने कहा की कला और एक लयबद्ध अतीत विषयक सत्र में पेंटर, प्रिंटमेकर और इंस्टॉलेशन आर्टिस्ट विनय शर्मा रूबरू हुए।

विनय ने सत्र में चर्चा के दौरान बताया कि बचपन में देखे गए गांव, देहात, मकान और पहाड़ों के परिवेश के बीच लकड़ी की तख्ती पर लिखा क वर्ण मेरी कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बना और इन्ही सबका प्रभाव मेरी कलाकृतियों में झलकता है। यही कला यात्रा समय के साथ गांव से शहर होते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है। पेपरमैन के बारे में विनय कहते है कि भारतीय परंपरा को पुनः जीवित करने के उद्देश्य व हमारे अतीत से आम लोगों को रूबरू करवाने के लिए पेपरमैन उनकी कला यात्रा का एक पड़ाव है।

विनय कहते है कि भारतीय परंपरा को पुनः जीवित करने के उद्देश्य व हमारे अतीत से आम लोगों को रूबरू करवाने के लिए पेपरमैन उनकी कला यात्रा का एक पड़ाव है।

विनय कहते है कि भारतीय परंपरा को पुनः जीवित करने के उद्देश्य व हमारे अतीत से आम लोगों को रूबरू करवाने के लिए पेपरमैन उनकी कला यात्रा का एक पड़ाव है।

विनय मानते है की प्रत्येक प्राचीन वस्तु में एक भाव निहित होता है जिसके कारण एक व्यक्ति जब इन वस्तुओं से जुड़ता है तो उसके भीतर एक जीवन का आभास होता है. पेपर मैन का अवतार उनकी आत्मा को जोड़ने का प्रयास करता है और सात्विकता, पवित्रता, सार और निर्माण में किए गए प्रयत्नों की अनकही कहानियों को सुनाता है।

विनय कहते है कि मैंने हर उस वस्तु को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया जो हमारी परंपरा का अंग रही हो और मेरी इसी जीजीविशा ने मुझे इन वस्तुओं के संग्रह के लिए भी प्रेरित किया।

विनय कहते है कि मैंने हर उस वस्तु को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया जो हमारी परंपरा का अंग रही हो और मेरी इसी जीजीविशा ने मुझे इन वस्तुओं के संग्रह के लिए भी प्रेरित किया।

संग्रहालय के बारे में विनय कहते है कि मैंने हर उस वस्तु को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया जो हमारी परंपरा का अंग रही हो और मेरी इसी जीजीविशा ने मुझे इन वस्तुओं के संग्रह के लिए भी प्रेरित किया। परंपरा को साथ लिए बिना किसी भी देश की प्रगति संभव नहीं है। विनय कहते है कि वह अपनी प्रत्येक नियमित यादों को बचपन की पगडंडी से लेकर जयपुर, वड़ोदरा से जर्मनी, पोलैंड, इजिप्ट और मलेशिया होते हुए वर्तमान तक की यात्रा का कलात्मक संग्रह कर कहानियों और स्मृतियों को आधुनिक कला के रूप में संजो रहे हैं।

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