जनवरी में होगी जमानत याचिका पर सुनवाई: जेल से बाहर आने की आसाराम की उम्मीदों को लगा झटका, सुप्रीम कोर्ट का फिलहाल जमानत देने से इनकार



जोधपुर17 मिनट पहले

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आसाराम।

नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम के जेल से बाहर आने की उम्मीदों को जोरदार झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उसे जमानत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आसाराम के खिलाफ गुजरात में दुष्कर्म के एक मामले की ट्रायल चल रही है। ऐसे में जमानत नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट अब इस याचिका पर जनवरी में फिर से सुनवाई करेगा।

जोधपुर जेल में बंद आसाराम की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बढ़ती उम्र के साथ कई बीमारियों का इलाज कराने के लिए जमानत देने का आग्रह किया था। उसकी कुछ बीमारियों का इलाज जेल में रहते हुए संभव नहीं है। साथ ही कहा गया कि आसाराम से जुड़े मामले की ट्रायल बहुत लंबी हो रही है। इसके शीघ्र पूरी होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे है। वहीं आसाराम को जमानत प्रदान किए जाने का विरोध करते हुए सरकारी वकील की तरफ से कहा गया कि आसाराम को किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं है। उसके खिलाफ ट्रायल भी जारी है। ऐसे में जमानत प्रदान किया जाना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए फिलहाल जमानत नहीं देने का फैसला किया और मामले की अगली सुनवाई जनवरी में करने का तय किया।

यह है मामला

आसाराम आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया कि पंद्रह अगस्त 2013 को आसाराम ने जोधपुर के निकट मणाई गांव में स्थित एक फार्म हाउस में उसका यौन उत्पीड़न किया। बीस अगस्त 2013 को उसने दिल्ली के कमला नगर पुलिस ताने में आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज कराया। जोधपुर का मामला होने के कारण दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के लिए उसे जोधपुर भेजा। जोधपुर पुलिस ने आसाराम के खिलाफ नाबालिग का यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज किया। जोधपुर पुलिस 31 अगस्त 2013 को इन्दौर से आसाराम को गिरफ्तार कर जोधपुर ले आई। उसके बाद से आसाराम लगातार जोधपुर जेल में ही बंद है। 25 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को मरते दम तक जेल में रहने की सजा सुनाई। इस दौरान उनकी तरफ से उच्चतम व उच्च न्यायालय सहित जिला न्यायालय में 15 से अधिक बार जमानत हासिल करने के प्रयास किए गए। उनकी तरफ से राम जेठमलानी, सुब्रहमण्यम स्वामी, सलमान खुर्शीद सहित देश के कई जाने माने विधिवेत्ता पैरवी कर चुके है। इसके बावजूद किसी कोर्ट ने उसे जमानत प्रदान नहीं की।

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