ग्रामीणों ने सब्जी हाट ठेके में धांधली का लगाया आरोप: बोले- ठेकेदार और ग्राम पंचायत प्रशासन ने की सांठगांठ, कलेक्टर से की शिकायत




धौलपुर39 मिनट पहले

ग्रामीणों ने ठेकेदार और ग्राम पंचायत प्रशासन पर सांठगांठ कर कम रुपए में ही ठेका लेने का आरोप लगाया है।

धौलपुर जिले की सैंपऊ ग्राम पंचायत का विवादों से नाता खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को ग्राम पंचायत की बैठक में सरपंच और वार्ड पंचों की मौजूदगी में हुआ सब्जी हाट ठेका भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। नीयत समय के 8 महीने बाद किए गए साप्ताहिक हाट ठेके में धांधलेबाजी के चलते स्थानीय पंचायत फिर से सुर्खियों में है। पंचायत की पूर्व सरपंच स्नेह लता परमार ने हाट ठेके में धांधली का आरोप लगाते हुए बताया कि साप्ताहिक सब्जी हाट टेंडर प्रक्रिया के लिए सरपंच की अध्यक्षता और वार्ड पंचों की मौजूदगी में ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें दिसंबर 2022 से मार्च 2023 तक यानी 4 महीने के लिए हाट ठेका की बोली लगाई गई। बोली प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही ठेकेदार और ग्राम पंचायत प्रशासन ने सांठगांठ करते हुए 1.66 लाख की अंतिम बोली बोलने वाले ठेकेदार को हाट ठेका दे दिया।

उन्होंने बताया कि इस दौरान अंतिम बोली लगाने वाले ठेकेदार ने अन्य सभी ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया से नाम वापस लेने पर 5-5 हजार रुपए दिए। बोली प्रक्रिया देखने पहुंचे स्थानीय लोगों ने बताया कि ग्राम पंचायत को आर्थिक चपत लगाने का सारा खेल सरपंच और वार्ड पंचों की मौजूदगी में ही किया गया, जबकि सरपंच और वार्ड पंच चाहते तो ग्राम पंचायत को 4 लाख से ज्यादा की आमदनी हो सकती थी। साप्ताहिक हाट टेंडर को लेकर की गई धांधली के मामले में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चेतन चौहान और कलेक्टर अनिल कुमार अग्रवाल को शिकायत की गई है।

पिछली बार 14 लाख से ज्यादा का हुआ था 12 महीने का ठेका
पिछली बार मार्च 2021 में ग्राम पंचायत प्रशासन ने 14 लाख से ज्यादा रुपए में साप्ताहिक हाट ठेके का टेंडर किया था। इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष में समय से ठेका नहीं कराए जाने के कारण पंचायत की साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। सोमवार को नए सिरे से 4 महीने के लिए ग्राम पंचायत प्रशासन ने दिसंबर महीने से लेकर मार्च 2023 तक के लिए हाट ठेका कराया है। लोगों ने आरोप लगाया कि बोली प्रक्रिया में 11 ठेकेदारों ने भाग लिया। शुरुआती दौर में खुली बोली लगाए जाने के बाद ठेकेदार ने पंचायत प्रशासन की शह पर आपस में मिलीभगत करके बोली लगाने के बजाय लीपापोती करते हुए टेंडर को बेहद कम रुपए में ले लिया।

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