गायत्री देवी की हजारों करोड़ की संपत्ति पर विवाद: 11 साल पुराने केस में पोते-पोती को राहत, 17 बेशकीमती प्रॉपर्टी की इनसाइड स्टोरी



जयपुर42 मिनट पहलेलेखक: नीरज शर्मा

जयपुर की पूर्व राजमाता गायत्री देवी की वसीयत से जुड़े मामले पर पिछले दिनों जयपुर की कोर्ट ने एक फैसला देकर उनके पोते-पोती को बड़ी राहत दी है। इससे गायत्री देवी की वसीयत से जुड़ा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। पहले पढ़िए, क्या है गायत्री देवी की वसीयत…

‘मैं जयपुर की राजमाता गायत्री देवी। यह पुष्टि करती हूं कि मेरे पोते-पोती महाराज देवराज और लालित्या से मेरे प्रेम और स्नेह के चलते मैं रामबाग पैलेस होटल प्राइवेट लिमिटेड, जय महल होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, SMS इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, सवाई माधोपुर लॉज प्राइवेट लिमिटेड और जयपुर ताज एंटरप्राइजेस को संयुक्त रूप से महाराज देवराज और राजकुमारी लालित्या को ट्रांसफर करने के लिए पहले ही जरूरी ट्रांसफर डीड पर हस्ताक्षर कर चुकी हूं। यह शेयर होल्डिंग मेरे बेटे महाराज जगत सिंह के निधन पर जयपुर के डिस्ट्रिक्ट जज के ऑर्डर से मुझे प्राप्त हुई हैं।

जीवन अनिश्चित है, इसलिए मैं अपने परिवार में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए अपनी संपत्तियों का प्रावधान करना चाहती हूं। पूर्व की सभी वसीयतों को पलटते हुए अब मैं घोषणा करती हूं कि इस आखिरी इच्छा के अनुसार मेरे निधन पर मेरी सभी सम्पत्तियां, ज्वेलरी, कैश, स्कूलों की कंट्रोलिंग देवराज और लालित्या को हमेशा के लिए मिल जाए। मुझे विश्वास है कि मेरी इन इच्छाओं को सभी तरह से पूरा करते हुए महाराजा भवानी सिंह, महाराज पृथ्वी सिंह और महाराज जय सिंह मेरे पोते-पोतियों को पूरा सपोर्ट करेंगे।’

11 साल की लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद पिछले दिनों सिर्फ इस बात का फैसला आया है कि वसीयत के वैध या अवैध साबित हाेने तक उनके पोते-पोती गायत्री देवी की संपत्तियों से जुड़े फैसले ले सकते हैं। गायत्री देवी के सौतेले बेटों की याचिका पर जयपुर के अपर जिला जज ने गायत्री देवी की संपत्ति को लेकर उनके पोते-पोती को किसी भी तरह के निर्णय लेने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह विवाद और पेचीदा हो सकता है क्योंकि याचिका दायर करने वाले गायत्री देवी के परिवार के सदस्य अब हाईकोर्ट जा सकते हैं।

जानकारों के मुताबिक यह पूरी संपत्ति करीब-करीब 30 हजार करोड़ की है, हालांकि इसका सटीक वैल्यूएशन तभी हो सकता है जब पूर्व राजपरिवार की सभी प्रॉपर्टी की डिटेल सामने हो।

जयपुर के पूर्व राजघराने के सदस्यों के बीच झगड़ा जितना गहरा है, उतना ही उलझा हुआ भी है। आज की संडे बिग स्टोरी में इस झगड़े के उलझे धागों को एक-एक कर सुलझाएंगे और आपको बताएंगे कि आखिर ताजमहल, देश की संसद और राष्ट्रपति भवन जैसी इमारतों के लिए जमीन दान करने वाले जयपुर राजघराने में कौन-कौन सी बेशकीमती प्रॉपर्टीज को लेकर कितनी लड़ाई चल रही है और यह कैसे खत्म हो सकती है?

सबसे पहले जानिए कि करोड़ों की प्रॉपर्टी का झगड़ा आखिर किसके बीच है?

लड़ाई किस बात को लेकर है?
जगत सिंह की शादी थाईलैंड की राजकुमारी प्रियनंदना सिंह से हुई थी। जगत सिंह अक्सर लंदन में ही रहते थे, लेकिन कुछ ही सालों में दोनों का तलाक हो गया। प्रियनंदना तलाक के बाद थाईलैंड रहने लगीं। दोनों की एक बेटी लालित्या कुमारी और बेटा देवराज भी ज्यादातर मां के साथ ही रहे। 1997 में जगत सिंह की लंदन में मृत्यु हो गई, लेकिन जगत सिंह के निधन के बाद दादी गायत्री देवी से मिलने जयपुर आते-जाते रहे।

जयपुर के आखिरी महाराज सवाई मान सिंह ने सबसे छोटे बेटे जगत सिंह को गिफ्ट में जयमहल पैलेस दिया था। मीडिया रिपोट्‌र्स के मुताबिक जगत सिंह ने अपने भाई पृथ्वी सिंह व जय सिंह के साथ मिलकर एक कंपनी सेटअप की और जयमहल पैलेस को फाइव होटल बनाने के लिए ताज ग्रुप को दिया। जयमहल पैलेस में जगत सिंह के 99 प्रतिशत शेयर थे और पृथ्वी सिंह व जय सिंह के पास 1 प्रतिशत शेयर। वहीं संपत्ति बंटवारे में रामबाग पैलेस में जगत सिंह को 27 प्रतिशत शेयर मिले थे।

जगत सिंह ने प्रियनंदना सिंह और बच्चों को संपत्ति से बेदखल करते हुए 1996 में सारी संपत्ति अपनी मां गायत्री देवी के नाम कर दी थी। उनकी मौत के बाद गायत्री देवी ने इन संपत्तियों की देखरेख विजित सिंह को सौंप दी। इसकी भी एक बड़ी वजह थी। दरअसल, गायत्री देवी के भाई की बेटी यानी उनकी भतीजी देविका देवी की शादी सौतेले बेटे पृथ्वी सिंह से हुई थी। विजित देविका देवी और पृथ्वी सिंह के ही बेटे हैं।

सूत्रों के मुताबिक इन सबके बीच देवराज और लालित्या कुमारी ने संपत्ति पर हक के लिए अदालती लड़ाई लड़ी। मीडिया रिपोट्‌र्स के मुताबिक प्रियनंदना सिंह ने आरोप लगाया कि पृथ्वी सिंह व उनके बेटे विजित सिंह ने जयमहल पैलेस से जगत सिंह के शेयर घटाकर 7 प्रतिशत कर दिए और अपने पास 93 प्रतिशत शेयर रखे। वहीं, रामबाग पैलेस में भी जगत सिंह के शेयर 27 से 4 प्रतिशत पर आ गए। 2006 में इन सबके खिलाफ देवराज और लालित्या कुमारी ने कोर्ट केस फाइल किए।

तमाम अदालती लड़ाईयों के बीच इस दौरान लालित्या-देवराज व गायत्री देवी के बीच रिश्ते और अच्छे होते गए। 2009 में गायत्री देवी ने अपनी वसीयत के जरिए सारी संपत्ति लालित्या-देवराज के नाम कर दी।

यहां से झगड़ा और बढ़ गया। गायत्री देवी देश के सबसे महंगे होटल रामबाग पैलेस के कैंपस में ही बने लिली पूल में रहती थीं। यह बंगला फ्रेंच स्टाइल में बना हुआ है। गायत्री देवी के निधन के बाद देवराज काे लिली पूल खाली करने का नोटिस दिया गया। इससे नाराज देवराज ने गायत्री देवी की पहली बरसी पर मीडिया के सामने आकर जय सिंह और पृथ्वी सिंह उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। इसके बाद मामला खिंचता चला गया।

2011 में पृथ्वी सिंह, उर्वशी कुमारी ने जयपुर जिला अदालत में गायत्री देवी की वसीयत पर सवाल उठाए और केस दायर करते हुए कहा कि जगत सिंह गायत्री देवी के बेटे नहीं थे। उन्हें पहले ही ईसरदा जागीर के जागीरदार बहादुर सिंह को गोद दे दिया गया था। एक बार गोद देने के बाद बेटा वापस नहीं आता है।

देवराज के वकील एडवोकेट रजत रंजन ने बताया कि हमने कोर्ट में जवाब दिया कि गायत्री देवी और महाराजा मान सिंह ने उन्हें बेटा माना है और इससे संबंधित दस्तावेज भी पेश किए। वहीं जय सिंह व अन्य लोगाें के वकील रामजी लाल गुप्ता ने बताया कि हमने जगत सिंह के गोद जाने की रस्म से जुड़े फोटो समेत कई दस्तावेज कोर्ट को सौंपे थे।

11 साल पहले कोर्ट से अपील की गई थी कि जब तक केस कोर्ट में चल रहा है तब तक देवराज और लालित्या को पाबंद किया जाए कि वो वसीयत के आधार पर मिली सम्पत्ति को बेचने से जुड़े कोई फैसले नहीं लें। इसे पिछले दिनों कोर्ट ने खारीज कर दिया।

साल भर पहले रामबाग पैलेस और जयमहल पैलेस पर कोर्ट के बाहर हुआ समझौता
करीब साल पहले दोनों प्रॉपर्टी पर जय सिंह, विजित सिंह और देवराज-लालित्या कुमारी के बीच कोर्ट के बाहर समझौता हाे चुका है। सूत्रों के मुताबिक कोर्ट केस से परेशान हो चुके पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट की पहल और आपसी सामंजस्य से तय किया दोनों पक्ष एक-एक होटल का मालिकाना हक रखें और दूसरे में से छोड़ दें।

इस समझौते में जय सिंह व विजित सिंह को 48 एकड़ में फैला लग्जरी रामबाग पैलेस मिला तो देवराज-लालित्या को जयमहल पैलेस मिला। दोनों प्रॉपर्टी करीब 15 हजार करोड़ की हैं, लेकिन इनके अलावा कई और प्रॉपर्टीज भी हैं, जिन पर दोनों पक्षों के बीच झगड़े चल रहे हैं।

यह संपत्तियां कौन सी हैं और क्या वैल्यू है?
गायत्री देवी का घर लिली पूल रामबाग पैलेस होटल का ही हिस्सा है। लिली पूल बंगला सहित, एसएमएस इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, मोती डूंगरी किला, सवाई माधोपुर स्थित रॉयल फैमिली के विमान भवन सहित अचल संपत्तियों पर कोई फैसला नहीं हुआ है।

माना जाता है कि ये प्रॉपर्टी भी करीब-करीब 15 हजार करोड़ से ज्यादा की हैं। हालांकि अधिकारिक रूप से इसका कोई डेटा नहीं है। इसके अलावा गायत्री देवी के शेयर्स, कैश, ज्वेलरी, बेंटले कार(गायत्री देवी के नाम), जगुआर कार(जगत सिंह के नाम) की कीमत अरबों में हैं, इसके साथ ही कई एंटीक आइटम ऐसे हैं, जिनकी कीमत आंकना संभव नहीं है।

लिलीपूल से कई सामान चुराने का आरोप
करीब 11 साल पहले आरोप लगाए गए थे कि गायत्री देवी के निधन के बाद उनके घर लिली पूल से कई कीमती सामान चुरा लिए गए। इन सबको लेकर खूब विवाद हुआ, हालांकि कहीं कुछ साबित नहीं किया जा सका।

क्या कोर्ट केस के बाहर समझौता संभव नहीं है?
जानकारों के मुताबिक भारत के कई राजघरानों के पारिवारिक सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर कई दशकों से कोर्ट में केस चल रहे हैं। यह केस इतने पेचीदा हाेते हैं कि इनमें समय लगता ही है। जैसे देवराज, लालित्या कुमारी और जय सिंह व विजित सिंह के बीच कोर्ट के बाहर रामबाग पैलेस और जयमहल पैलेस को लेकर समझौता हुआ, वैसे ही समझौता का रास्ता अन्य संपत्तियों को लेकर भी खुला है। दोनों पक्षों के बीच इसे लेकर इस साल कुछ दौर की बातचीत भी हुई है, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया है।

सूत्रों के मुताबिक रामबाग पैलेस होटल का मैनेजमेंट लिली पूल पर भी दावा कर रहा है, लेकिन देवराज का तर्क है कि जब मोती डूंगरी किला उनके पास नहीं रहा तो लिली पूल उन्हीं के पास रहना चाहिए। गायत्री देवी पहले मोती डूंगरी किले में ही रहती थीं, परिवार की सलाह के बाद वे लिली पूल में आकर रहने लगीं। फिलहाल मोती डूंगरी किला विजित सिंह के पास है। हालांकि विजित सिंह के वकील रामजी लाल गुप्ता ने कहा कि फिलहाल इस मामले पर कोर्ट केस ही चल रहा है।

जयपुर राजपरिवार के अलावा बाहरी लोगों का भी दावा
जयपुर के पूर्व राजपरिवार की संपत्ति विवाद केवल उनके उनके परिवार तक ही नहीं है। वंशज देवराज, लालित्या, जयसिंह और विजित सिंह सहित परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा अकूत संपत्तियों पर बाहरी लोगों ने भी दावेदारी जता रखी है।

ठाकुर श्यामसिंह और उनके पावर ऑफ अटॉर्नी बलवान सिंह ने भी कोर्ट में राजपरिवार से जुड़ी कुछ जमीनों पर अपना दावा जता रखा है। श्याम सिंह ने खुद को पूर्व राजपरिवार के सेवक के रूप में काम करते रहने का दावा किया था। श्याम सिंह ने दुर्गापुरा रेलवे स्टेशन के पास करीब 1500 वर्ग गज जमीन और मानसरोवर के शिप्रापथ इलाके में 2700 वर्गमीटर जमीन पर दावा किया है।

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