खूबसूरत डकैत, जिसे देखने कोर्ट के बाहर लगती भीड़: जिसके प्यार में कुख्यात डकैत जगन ने 2 बार किया सरेंडर; बोली- सब भुलाना चाहती हूं



जयपुर/धौलपुर16 मिनट पहले

80 के दशक में चंबल के बीहड़ों में एक ही नाम गूंजता था…फूलन देवी।

बदले की आग ने फूलन देवी को सबसे खूंखार डकैत बनाया, कुछ ऐसी ही कहानी उस दौर में धौलपुर के नगर गांव में 1986 में पैदा हुई एक लड़की की भी है, जिसने अपने सरपंच पिता की हत्या का बदला लेने के लिए 14 साल की उम्र में ही बंदूक थाम ली।

बीहड़ों में AK-47 लेकर घूमने वाले कुख्यात डकैत जगन गुर्जर से प्यार हुआ। जंगलों में बच्चे को जन्म दिया। इतनी खूबसूरत कि जब पकड़ी गई तो उसे देखने कोर्ट के बाहर लोगों की भीड़ लगती थी।

हम बात कर रहे हैं पूर्व कुख्यात डकैत कोमेश गुर्जर की जिसने 2 मर्डर किए। बंदूक की गोलियों से कई लोगों का सीना छलनी किया। 2 साल में 18 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए।

संडे बिग स्टोरी में पहली बार देखिए कोमेश गुर्जर के डकैत बनने की पूरी कहानी….

बीते दिनों जब डकैत भौंटा गुर्जर को छानते हुए धौलपुर पुलिस चंबल के बीहड़ों में पहुंची तो भास्कर टीम ने भी उनका पीछा किया। चिलीपुरा में तीन डकैतों के LIVE एनकाउंटर में पकड़ने की कवरेज से लौटते समय टीम नगर गांव से गुजर रही थी। किसी ने बताया कि कोमेश गुर्जर इसी गांव में रहती है।

फिर क्या था, हमने अपनी गाड़ी उस गांव की तरफ मोड़ दी। बीच रास्ते में एक 18-20 का लड़के ने हमें एड्रेस बताया। 10 मिनट बाद कोमेश के घर के बाहर पहुंच गए।

यहां एक सीमेंटेड, लेकिन बिना छत का मकान था, जिसके बाहर लोहे का मजबूत गेट लगाया हुआ था। हमने आवाज लगाईं। तभी साड़ी पहने और मासूम बच्ची को गोद में लिए एक महिला सामने आ गई। बोली- कौन हैं आप, बताओ क्या काम है?

जैसे हमने अपना परिचय दिया और बताया कि हम आपका इंटरव्यू करना चाहते हैं तो कोमेश एकदम से उखड़ गई। बोली- मुझे कोई बातचीत नहीं करनी। इतना कहते ही कोमेश वापस लौट गई। दोबारा आवाज लगाने पर कोई जवाब नहीं दिया।

लेकिन थोड़ी ही देर बाद वापस आई। दरवाजा खोला और कहा- इंटरव्यू से क्या होगा? मेरी जिंदगी बदल दोगे? बड़ी मुश्किल से संघर्ष करते हुए दूध बेचकर अपने बच्चों को पाल रही हूं। यहां से भी सब बेच-बाच कर जल्दी ही बाड़ी और धौलपुर भी छोड़ दूंगी।

खूब समझाइश के बाद आखिरकार कोमेश गुर्जर पहली बार किसी मीडिया कैमरे पर खुद को दिखाने के लिए राजी हुई। पढ़िए कोमेश ने हमें जो कुछ बताया…….

जब मैं छोटी थी तब मेरे पापा छीतरिया गुर्जर की हत्या हो गई। इसका बदला लेना चाहती थी। मन में बेहद गुस्सा था। बदले की आग में जलती हुई में बीहड़ों में चली गई। वहीं मेरी मुलाकात जगन से हुई। जगन को मैंने बचपन से देखा है। घर पर आना-जाना था। तब से मन ही मन उससे प्यार करने लगी थी। बीहड़ में मुलाकात के बाद जगन ने ही मुझे बंदूक थमाई और बदला लेने में मदद की। जंगल में ही बच्चे का जन्म हुआ।

बीहड़ों में हर समय पुलिस का खतरा रहता था। गोलियां चलती थी। कभी खाने के लिए कभी तो लजीज पनीर भी मिल जाता था, कई बार पानी भी नसीब नहीं होता था। तीन-चार दिन तक भूखे-प्यासे जंगलों में बचते-बचाते छिपते-फिरते थे।

ऐसे ही भागते समय एक बार पुलिस गोलीबारी में घायल हुई। तब दूसरी बार प्रेग्नेंट थी। पेट में पल रहे मेरे बच्चे की मौत भी हो गई। यह पहली बार था जब पुलिस ने मुझे पकड़ लिया।

डिलीवरी के लिए जंगल से अकेले हिंडौन पहुंची, बच्चे को जन्म दिया
कोमेश ने हमें बताया, साल तो मुझे अच्छे से याद नहीं लेकिन शायद 2000 के आस-पास की बात है। तब मैं प्रेग्नेंट थी। मुझे हॉस्पिटल ले जाना जरूरी था। गैंग के साथियों और जगन की जान खतरे में नहीं डाल सकते थे। ऐसे में अकेले ही ऊंटों पर जंगल-जंगल होते हुए हिंडौन सिटी पहुंच गई। रास्ते में रिश्तेदारों और जगन के लोगों से मदद मिलती रही।

इसके बाद हिंडौन के नर्सिंग होम में ही अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। ये जो लवकुश आपके सामने खड़ा है, तब यहीं पैदा हुआ था। ये बोल-सुन नहीं पाता है।

थोड़े दिन नर्सिंग होम में बिताने के बाद जगन और गैंग साथियों की मदद से दुबारा ऊंटों पर बैठ बच्चे के साथ बीहड़ों में पहुंच गई। जगन ने दुश्मन गैंग के कई लोगों को रास्ते से हटा दिया था, लेकिन कई बदले अभी बाकी थे।

इसलिए दुबारा फिर वहीं डकैत-पुलिस का खेल शुरू हो गया। हम लोग बागी होकर अपने दुश्मनों से बदला लेते थे। कोमेश ने दावा किया कि वो कभी गरीबों को परेशान नहीं करते थे। जब डकैत की छवि बन ही गई थी तो फिर पीछे क्या हटना।

पुलिस एनकाउंटर में लगी गोली

कोमेश ने बताया कि 15 साल पहले वर्ष 2008 में दुबारा जब प्रेग्नेंट हुई, तब भी जिंदगी बीहड़ों में ही बीत रही थी। हमें पुलिस ने घेर लिया था। कई घंटों तक मुठभेड़ चलती रही। अंत में एक गोली मुझे लगी और मैं घायल हो गई। इसी हालत में पुलिस ने मुझे पकड़ लिया। कोमेश ने दावा किया कि तब पहली बार वह पुलिस के हाथ लगी थी।

कोमेश ने बताया कि मुझे अरेस्ट करने के लिए तब महिला पुलिसकर्मियों की बड़ी फोर्स बुलाई गई थी। इसी एनकाउंटर में मेरे पेट में पल रहे दूसरे बच्चे की मिसकैरेज के चलते मौत हो गई। मेरे अरेस्ट होने के बाद साल 2009 में जगन ने भी कैमरी गांव के जगन्नाथ मेले में दूसरी बार कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने सरेंडर कर दिया था।

पेशी के लिए धौलपुर कोर्ट लाए तो देखने लग गई भीड़
कोमेश ने हमें बताया कि पकडे़ जाने के दौरान जब-जब पुलिस उसे पेशी पर धौलपुर कोर्ट लाती तो उसे देखने के लिए वहां लोगों की भारी भीड़ लग जाती थी। हमने भी कई लोगों के मुंह से ये किस्से सुने थे तो इस पर कोमेश से सवाल किया, इतनी भारी भीड़ क्यों लगती थी?

कोमेश बोली, पता नहीं, लेकिन ये सच है कि लोग आते थे। वहीं इस बारे में हमने कुछ पुराने लोगों से पूछा तो उन्होंने बताया, कोमेश खूबसूरत तो थी ही लेकिन राजस्थान की पहली महिला डकैत जो पेंट शर्ट पहनती हो। बस यहीं देखने लोग वहां आते थे।

….पुराना साया नहीं छूट पाया
पहली बार जेल से छूटने के बाद मैंने आम गृहिणी की जिंदगी बिताना शुरू कर दिया। बाड़ी में थोड़ी बहुत खेती की जमीन है, वहां खेती बाड़ी भी की। दो भैंसें पाली और उनके दूध को बेचकर शान्ति से जीवन गुजारना शुरू कर दिया। केस-मुक़दमे भी निपट रहे थे।

लेकिन पुराना साया पीछा नहीं छोड़ता है। जगन भी शराब पीने के बाद कुछ न कुछ ऐसा कर देता था कि कभी कोई दूसरा डकैत तो कभी पुलिस घर आ धमकती। अब क्या बताऊं? घर में आधार कार्ड तक नहीं छोड़े, वो भी तलाशी के दौरान ले गए। कई बार जेल जाना पड़ा।

जेल से छूटने के बाद बच्ची को जन्म दिया, नाम रखा काजल
दूसरी बार जेल से छूटने के बाद करीब पांच साल पहले बेटी काजल पैदा हुई। तब सब कुछ बढ़िया चल रहा था। हंसी-खुशी अपना परिवार चला रहे थे। कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन जो ये डकैत का ठप्पा हमारे ऊपर लग गया है ये आज भी परेशान करता है।

कहीं कोई वारदात होती है तो पुलिस पहुंच ही जाती है। फैमिली को राजनीति रूप से भी टारगेट किया गया। अब बच्चों के लिए छिप-छिप कर अपनी जिंदगी गुजारते हैं। लव कुश को स्कूल में पढ़ने धौलपुर भेजा, पर ये वहां भी नहीं टिका। ऊंची-ऊंची दीवारें कूदकर वापस घर आ जाता है।

8 साल पहले हुई भाई की हत्या का दो साल पहले लिया बदला

कोमेश ने बताया कि कुछ लोगों ने साल 2014 में उसके छोटे भाई रामू की हत्या कर दी थी। तब वो पुराने मामलों में जगन के साथ भरतपुर की जेल में बंद थी। भाई की हत्या पर जितना दुख हुआ, उतना ही बदला लेने का गुस्सा था। हत्यारे आजाद घूम रहे थे। ऐसे में दो साल पहले उसकी हत्या का भी बदला पूरा कर लिया। हमने कोमेश से पूछा बदला कैसे पूरा किया? वो बोली मारकर।

इस हत्याकांड के बारे में कोमेश ने तो हमें कुछ नहीं बताया लेकिन पुलिस रिकॉर्ड से हमें पता चला कि साल 2014 में कोमेश अपने पति डकैत जगन गुर्जर के साथ जेल में थी। तब एक प्लॉट के विवाद में उसके भाई रामू की हत्या कर दी थी।

इसके बाद कोमेश ने अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए अपने रिश्तेदार देवर जंडेल गुर्जर के साथ मिलकर आरोपी संजीत कोली की हत्या की साजिश रची। इसके बाद 21 अप्रैल 2020 को देर रात संजीत कोली की तिलुआ का अड्‌डा, बाड़ी स्थित उसके घर में घुसकर सिर में गोली मारकर हत्या कर दी।

5 महीने पहले दिया सबसे छोटी बेटी को जन्म, 4 महीने पहले ही जगन को हुई जेल
कोमेश ने बताया करीब 5 महीने पहले 28 जून को ही उसने धौलपुर में एक निजी चिकित्सालय में बच्ची को जन्म दिया था। 4 महीने पहले ही बाड़ी विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को धमकी भरे वीडियो वायरल करने के मामले में करौली पुलिस ने 7 फरवरी को जगन को पकड़ा था। हालांकि लोगों का कहना है कि तब जगन ने सरेंडर ही किया था।

‘मैं राजस्थान की पहली महिला डकैत अब सब कुछ भुलाना चाहती हूं’
कोमेश ने कहा हां मैं राजस्थान की पहली महिला डकैत हूं, लेकिन अब सब कुछ भुलाना चाहती हूं। डकैतों के जीवन में सिवाय दुःख और जिल्लत के कुछ भी नहीं है। इतना संघर्ष है कि याद करते ही सिहर उठती हूं। अब ये सब भूलना चाहती हूं। अब तीन बच्चों को लेकर में यहां से 400 किलोमीटर दूर अजमेर उससे मिलने भी नहीं जा सकती। कहां से लाऊं बस का किराया?

बड़ी मुश्किल से दूध बेचकर अपने बच्चों का पेट पाल रही हूं। अब परेशान हो गई हूं, जल्दी ही यहां से सब कुछ बेच बाच कर कही और चली जाऊंगी। लोगों को बताना चाहती हूं कि अब मेरा डकैती बदमाशी से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है, अगर कोई ऐसा बनने की सोच रहा तो उसे छोड़ दे। हमारी दुनिया झूठी है।

कौन है डकैत जगन गुर्जर?
जगन गुर्जर धौलपुर के डांग के भवुतीपुरा का रहने वाला है। साल 1994 में जीजा की हत्या का बदला लेने के लिए वो डकैत बना। इसके बाद तो जगन ने चंबल के बीहड़ों में कई मर्डर किए। एक वक्त तो उस पर राजस्थान, उप्र और मप्र के कई थानों में 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे।

अंतिम बार जब उसे पकड़ा गया, उससे पहले वो एक के बाद एक कई केसों में बरी हो चुका था। उस पर आरोप है कि अधिकतर मामलों में उसने पीड़ितों और गवाहों को डरा धमका कर होस्टाइल कर लिया और राजीनामे करवा लिए।

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