कांग्रेस को घेरने गई बीजेपी वसुंधरा राजे को ही भूली: नेताओं में लगातार सामने आ रही खेमेबाजी; स्पीकर के बंगले के सामने राजे का घर, नहीं लिया साथ



  • Hindi News
  • Politics
  • Continuing Camp Among Leaders, Raje’s House In Front Of Speaker’s Bungalow, BJP Leaders Who Went To Give Memorandum Did Not Take

जयपुर41 मिनट पहलेलेखक: निखिल शर्मा

राजस्थान की राजनीति में खींचतान लगातार जारी है। कांग्रेस में जहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मतभेद और खींचतान जग-जाहिर हो चुकी है। वहीं, बीजेपी में भी अब खेमेबाजी साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। भले ही बाहरी तौर पर बयानों में बीजेपी के नेता एकजुटता की बातें करते हों, मगर असल में बीजेपी की अंदरूनी सियासत गुटबाजी में उलझ चुकी है।

ताजा उदाहरण मंगलवार को उस समय देखने को मिला जब कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफों के सम्बंध में ज्ञापन देने बीजेपी के विधायकों का डेलिगेशन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के घर पहुंचा। विधानसभा अध्यक्ष जोशी को ज्ञापन देने नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया, उपनेता राजेंद्र राठौड़ और अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी सहित कई विधायक पहुंचे।

मगर विधानसभा अध्यक्ष के ठीक सामने रह रहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस डेलिगेशन में दिखाई नहीं दीं। इसे लेकर वसुंधरा खेमे का यह कहना था कि उन्हें इसकी सूचना नहीं दी गई। जबकि इस बारे में बीजेपी के प्रमुख जिम्मेदार नेताओं को भास्कर ने पूछा तो वो इसकी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालते नजर आए।

इस बारे में पूछे जाने पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने इसे स्वीकारते हुए कहा कि मेरी डयूटी थी लेकिन मैं सूचना नहीं दे पाया। मगर अन्य विधायकों को बीजेपी प्रदेश ऑफिस से सूचना दी गई थी। वहीं उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने इसे सचेतक की जिम्मेदारी बता दिया। वहीं प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने नियमों का हवाला देते हुए इसे विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी बताया।

भास्कर ने जब बीजेपी के प्रदेश कार्यालय प्रभारी महेश शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरा काम कोई भी छोटी बैठकों की सूचना देना है। इस तरह की सूचनाएं देने का काम मेरा नहीं। यह प्रदेशाध्यक्ष या संगठन मंत्री के स्तर पर तय होती हैं। भले ही नेता एक-दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हों। मगर इससे बीजेपी के भीतर खींचतान साफ पता चलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह पहली बार नहीं जब नेता एक-दूसरे के कार्यक्रमों से दूरी बनाई हो।

अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 7 से 9 अक्टूबर के बीच वसुंधरा राजे ने बीकानेर संभाग और आसपास का दौरा किया। उन्होंने इस दौरान बीकानेर और चूरू में सभाएं भी की। मगर उनकी इन सभाओं और दौरों में ना ही प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया नजर आए और ना ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया। वहीं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अर्जुनराम मेघवाल भी नजर नहीं आए। जबकि बीकानेर अर्जुनराम मेघवाल का संसदीय क्षेत्र है और राजे बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

पूनिया का वसुंधरा के क्षेत्र में दौरा, वसुंधरा-कटारिया नदारद

इसी दौरान सतीश पूनिया ने हाड़ौती का दौरा किया। उन्होंने कोटा, झालावाड़, बूंदी, चित्तौड़गढ़ सहित आसपास के इलाकों में रैली और कार्यक्रम किए। मगर इन कार्यक्रम से वसुंधरा राजे ने दूरी बनाए रखी। फसल खराबे को देखने भी वसुंधरा और पूनिया अलग-अलग गए। इधर गुलाबचंद कटारिया सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी प्रदेशाध्यक्ष पूनिया के दौरे में नजर नहीं आए।

राजनाथ सिंह के उदयपुर कार्यक्रम में राजे-पूनिया नहीं पहुंचे

इससे पहले अगस्त के अंतिम सप्ताह में उदयपुर में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा कार्यक्रम हुआ था। यह कार्यक्रम नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने करवाया था। पन्नाधाय की मूर्ति के अनावरण के कार्यक्रम में ना ही वसुंधरा राजे आई। ना ही प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पहुंचे। केंद्रीय मंत्री शेखावत और अर्जुन मेघवाल भी इस कार्यक्रम से नदारद रहे। इस दौरान भी नेताओं के बीच आपसी खींचतान नजर आई।

शेखावत के कार्यक्रमों से भी नदारद दिखते हैं नेता

इसके अलावा पिछले कुछ समय में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के कार्यक्रमों में भी पार्टी की एकजुटता दिखाई नहीं पड़ती है। शेखावत अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम करते हैं। मगर उनमें ज्यादातर प्रमुख नेता नहीं दिखते। हालांकि शेखावत ने पिछले कुछ समय में कोई बड़ी सभा या सम्मेलन जैसा कार्यक्रम नहीं किया है।

इसी तरह पिछले महीने प्रदेशाध्यक्ष को पोखरण से रामदेवरा की अपनी 11 किलोमीटर की यात्रा अकेले करनी पड़ी। यह यात्रा पहले अलग ढंग से प्रस्तावित थी। मगर बाद में स्थगित हुई। कहा गया कि गृहमंत्री के 10 सितम्बर के जोधपुर कार्यक्रम के लिए इसे स्थगित किया गया है। मगर यात्रा के स्थगित होने को भी बीजेपी नेताओं की आपसी गुटबाजी के तौर पर देखा गया। बाद में पूनिया ने अकेले ही कुछ नेताओं के साथ मिलकर इस यात्रा को पूरा किया।

अपने-अपने स्तर के अलग-अलग कार्यक्रमों में जहां बीजेपी के नेताओं में खींचतान नजर आती है। मगर 30 सितम्बर को आबूरोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शो में बीजेपी एकजुट नजर आई। प्रधानमंत्री चंद मिनटों के लिए ही आबूरोड आए थे। मगर यहां प्रदेधाध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुनलाल मेघवाल सहित संगठन के तमाम नेता और कोर कमेटी नजर आई थी।

मेरी ड्यूटी थी उन्हें सूचना देना, जो मैं नहीं दे पाया : गुलाबचंद कटारिया

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि ये बात सही है कि उनको नहीं कहा गया। प्रदेश बीजेपी दफ्तर से ही लाेगों को सूचना दी गई थी। मुझे भी उन्होंने सूचना दी। मैंने कहा कि मेरी कमेटी की बैठक है, तो उसे निपटाकर मैं सीधा ही पहुंच जाऊंगा। मगर नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मेरी यह ड्यूटी थी कि मैं वसुंधरा जी को सूचना देता, जो मैं दे नहीं पाया। हालांकि विधायकों और अन्य लोगों को प्रदेश दफ्तर से सूचना दी गई थी।

सचेतक का काम सूचना देना होता है : राजेंद्र राठौड़

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने इसे लेकर कहा कि सूचना तो सभी नेताओं को दी जानी चाहिए। यह काम वैसे सचेतक का होता है कि वाे सूचना दे। इस बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी, कोई कन्फयूजन रहा होगा : सतीश पूनिया

प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि मेरी जानकारी में यह नहीं है। विधायिका में यह जिम्मेदारी विधायक दल के नेता की होती है। कोई कन्फयूजन रह गया होगा जिसके चलते सूचना नहीं जा पाई होगी। यह कार्यक्रम अचानक से तय हुआ था। अगर पहले से तय कार्यक्रम होता तो सभी विधायकों को बुलाया जाता और सूचना दी जातीञ



Source link


Like it? Share with your friends!

What's Your Reaction?

hate hate
0
hate
confused confused
0
confused
fail fail
0
fail
fun fun
0
fun
geeky geeky
0
geeky
love love
0
love
lol lol
0
lol
omg omg
0
omg
win win
0
win
khabarplus

0 Comments

Your email address will not be published.