कर्मचारियों ने निकाली वाहन रैली: समझौतों की क्रियान्विति नहीं होने से आक्रोश, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन



हनुमानगढ़30 मिनट पहले

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15 सूत्री मांगों को लेकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के बैनर तले बुधवार को कर्मचारियों कलक्ट्रेट के समक्ष विरोध-प्रदर्शन किया।

समान काम समान वेतन की नीति लागू करने, पूर्व के वेतनमानों में उत्पन्न विसंगतियों को दूर करने सहित 15 सूत्री मांगों को लेकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के बैनर तले बुधवार को कर्मचारियों कलक्ट्रेट के समक्ष विरोध-प्रदर्शन किया। इससे पहले जिले भर के कर्मचारी वाहन रैली निकालते हुए जिला कलक्ट्रेट के समक्ष पहुंचे। विरोध-प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कर्मचारियों ने 23 जनवरी को जयपुर में आक्रोश महारैली निकालने की घोषणा की है।

जिलाध्यक्ष चन्द्रभान ज्याणी ने बताया कि महासंघ की ओर से पिछले चार सालों से शासन और सरकार में सक्षम स्तर पर ज्ञापन एवं मांग पत्र देकर मांगों पर सुनवाई के लिए बार-बार निवेदन किया जा रहा है। महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने 16 नवंबर 2022 को मुख्य सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर 30 नवंबर तक मांगों का निस्तारण करने का अनुरोध किया था। मांगों का निस्तारण नहीं करने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद मांगों का निस्तारण तो दूर महासंघ से वार्ता भी नहीं की गई, जबकि मुख्यमंत्री की ओर से विभिन्न मुलाकातों तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुए संवाद में महासंघ की मांगों को उचित मानते हुए बार-बार निस्तारण का आश्वासन भी दिया गया। इसके अलावा महासंघ के घटक संगठनों की ओर से किए गए आंदोलनों में शासन तथा सरकार की ओर से सहमतियां तथा समझौते तो किए गए, लेकिन एक भी समझौते की क्रियान्विति नहीं की गई।

यह कर्मचारी संगठनों के विरुद्ध छल व विश्वास तोड़ने की नीति को प्रदर्शित करता है। इससे प्रदेश के 8 लाख कर्मचारियों में निराशा तथा आक्रोश का माहौल बन रहा है। इससे आहत होकर महासंघ ने आंदोलन का आगाज किया है। आंदोलन के प्रथम चरण में 15 दिसम्बर 2022 को जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सरकार को भिजवाए गए। 11 जनवरी 2023 को प्रदेश के सभी उपखण्ड अधिकारियों के माध्यम से पुन: ज्ञापन सौंपे गए। ज्याणी ने कहा कि महासंघ का यह संघर्ष 15 सूत्रीय मांग पत्र की मांगें तथा घटक संगठनों के साथ बनी सहमतियां तथा समझौते लागू करने तक निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि महासंघ के 15 सूत्री मांग पत्र पर निर्णय न करवाए जाने की स्थिति में प्रदेश के 8 लाख कर्मचारियों की ओर से 23 जनवरी को जयपुर में आक्रोश महारैली निकाली जाएगी

ये रहे मौजूद
इस मौके पर ब्लॉक कार्यकारिणी अध्यक्ष आजाद सहारण, दीपक पूनिया, मुकेश कुमार, इन्द्रपाल, सुखचरण सिंह, कमल कांत, सुखदीप सिंह, राजपाल गोदारा, शिक्षक संघ प्रगतिशील से बेगराज खोथ, ओमप्रकाश नान्देवाल, सुरेश जांगिड़, गुगन सहारण, कृषि पर्यवेक्षक संघ से आदराम मटोरिया, ग्राम विकास अधिकारी संघ से नरेश शर्मा, प्रेम कुमार, पटवार संघ से वीरेंद्र पारीक, अमरीश जाखड़, बलदेव रणवां, करणवीर भादू, मनीषा, पूजा शर्मा, कौशल्या आदि मौजूद थे।

जमीन का बाजार भाव से मुआवजा दिलाने की मांग
हनुमानगढ़ के कोहला से श्रीगंगानगर के साधुवाली तक बाइपास राजमार्ग के निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाने वाली किसानों की भूमि का बाजार भाव पर मुआवजा दिलवाने की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग आम आदमी पार्टी ने उठाई है। बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला कॉर्डिनेटर सुरेन्द्र बेनीवाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

आम आदमी पार्टी ने अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का बाजार भाव पर मुआवजा दिलवाने की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

आम आदमी पार्टी ने अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का बाजार भाव पर मुआवजा दिलवाने की पुख्ता व्यवस्था करने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

इस मौके पर जिला कॉर्डिनेटर सुरेन्द्र बेनीवाल ने कहा कि जिले में भारत माला प्रोजेक्ट के तहत किसानों की भूमि अवाप्ति में न केवल जमकर भ्रष्टाचार हुआ है बल्कि किसानों की बेशकीमती जमीन को औने-पौने भाव में अधिग्रहित किया गया है। किसानों के साथ प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए खूब ज्यादतियां की। इन सब चीजों को देखते हुए हनुमानगढ़ क्षेत्र के किसानों को आशंका है कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकार के साथ मिल कर कोहला (हनुमानगढ़) से साधुवाली (श्रीगंगानगर) तक बाइपास राजमार्ग के नाम पर किसानों की बेशकीमती जमीन कौडिय़ों के दाम पर छीन लेगी। बेनीवाल ने कहा कि किसानों के पास उपजाऊ जमीन पहले से ही कम है। ऐसे में धन का कटोरा कही जाने वाली घग्घर नदी एवं आसपास के क्षेत्र की जमीन अगर अधिग्रहित की जाती है तो इस क्षेत्र का किसान बर्बाद हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि लम्बे समय से इस क्षेत्र को राइस बेल्ट घोषित किए जाने की मांग किसानों की ओर से की जाती रही है। इस क्षेत्र के गेहूं और चावल से पूरे राजस्थान का पेट भरा जाता है। स्थानीय प्रशासन एवं प्रोजेक्ट से जुड़े हुए लोगों की ओर से इस क्षेत्र का गुपचुप तरीके से 3-4 बार सर्वे करवाया गया है। इस सर्वे में रसूखदार एवं प्रभावशाली लोगों को बचाते हुए छोटे किसानों को बली का बकरा बनाए जाने की आशंका है। बेनीवाल ने कहा कि जिस प्रयोजन के लिए इस बाइपास का निर्माण किया जा रहा है उसकी कोई आवश्यकता इस क्षेत्र के लोगों को नहीं लगती है क्योंकि साधुवाली से कोहला तक पूर्व में ही स्टेट हाईवे बना हुआ है जिस पर वर्षों तक टोल टैक्स वसूला जाता रहा है। फिर भी यदि केन्द्र सरकार समझती है कि इस राजमार्ग को बनाया जाना जरूरी है तो इसके लिए जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाए उन्हें बाजार भाव पर मुआवजा दिलवाने की पुख्ता व्यवस्था की जाए।

इसके लिए किसानों, किसान संगठनों, किसान संघर्ष समितियों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय प्रशासन की एक कमेटी गठित की जाए, जो मुआवजे संबंधी पूर्ण प्रक्रिया को मिलकर पूरा करे। इससे कहीं भी किसानों का अहित न हो। बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान सरकार स्वयं को किसान हितैषी बताती रही है। अगर वास्तव में ही राज्य सरकार किसान हितैषी है तो वह इस संबंध में भारत सरकार से सम्पर्क कर किसानों का पक्ष मजबूती के साथ रखे। यदि राज्य सरकार की ओर से इस क्षेत्र के किसानों की जमीन को जबरदस्ती औने-पौने दाम पर छीनने की कोशिश की गई तो आम आदमी पार्टी किसानों, किसान संगठनों एवं किसान संघर्ष समितियों के साथ मिल कर ईंट से ईंट बजाने को मजबूर होगी। इस मौके पर रोहित कुमार, राजकुमार, दीपक, अमित, अनिल, आशीष, जयदीप, गौरव मिश्रा, मुकेश शर्मा, बलविन्द्र, भूपराम, सहीराम, गुलशन कुमार, शुभकरण शर्मा आदि मौजूद थे।

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