ऑनलाइन बिक रहा बम बनाने का सामान: 5 एजेंसियां ढूंढ़ रहीं 1 सवाल का जवाब, रेलवे पुल पर धमाके के पीछे टेरेरिस्ट या नक्सली?



जयपुर35 मिनट पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे लाइन ट्रैक पर शनिवार रात सुपर पावर 90 डेटोनेटर से हुए ब्लास्ट ने पूरे राजस्थान को हिला दिया।

पुलिस को रेलवे ट्रैक पर बारूद भी मिला है। NSG, NIA, IB की टीमें उदयपुर में आतंकी और नक्सली हमले की आशंका को लेकर जांच कर रही हैं। इसके अलावा रेलवे पुलिस और उदयपुर पुलिस भी मामले की जांच में जुटी हुई है।

मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील है कि पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर को ही इस लाइन का उद्घाटन किया था। जी-20 की मीटिंग होने वाली है। इसके अलावा धमाके से चार घंटे पहले ही इसी ट्रैक से ट्रेन निकली थी।

उदयपुर-अहमदाबाद ट्रैक से अहमदाबाद-उदयपुर-असरवा ट्रेन नंबर 19703 और 19704 रोजाना गुजरती है। ट्रेन गुजरने के दौरान ब्लास्ट होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। धमाके के बाद ट्रैक से गुजरने वाली ट्रेन को डूंगरपुर में ही रोक दिया। ट्रेन में 665 यात्री सफर कर रहे थे।

भास्कर ने मामले में NSG, NIA, IB से जुड़े सूत्रों से बात की। प्राइमरी इन्वेस्टिगेशन में ब्लास्ट के 4 संभावित कारण सामने आए।

  • क्या ब्लास्ट आतंकी साजिश का हिस्सा था?
  • क्या ये नक्सली हमला था?
  • क्या माइंस के विरोध में ब्लास्ट हुआ?
  • क्या ये किसी किसी की शरारत थी?

पढ़िए, पूरी रिपोर्ट…

क्या ब्लास्ट आतंकी साजिश का हिस्सा?

आशंका क्यों : फिलहाल पुलिस घटना को आतंकी हमले से भी जोड़कर देख रही है। इसकी वजह है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में पीएफआई पर बैन लगाया था। पीएफआई नेताओं की भी गिरफ्तार की गई थी। हालांकि अभी इस बात के ठोस सबूत नहीं मिले हैं।

पुलिस की जांच : रेलवे के अधिकारियों ने उदयपुर के झावर माइंस थाने में सुपर पावर 90 डेटोनेटर मिलने पर आतंकी घटना के तहत ही एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर में विस्फोट के बाद की पूरी स्थिति के बारे में बताया गया है। ब्रिज पर विस्फोट कर देश की सुरक्षा खतरे में डालने की बात को लिखा गया है। NSG, NIA, IB की टीमें ट्रैक के साथ ही आसपास के गांवों में भी छानबीन कर रही है।

क्या ये नक्सली हमला था?

आशंका क्यों : दक्षिणी राजस्थान में काफी समय से आदिवासी राज्य बनाने की मांग की जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि ब्लास्ट में आदिवासी कट्‌टरपंथी का भी हाथ हो सकता है। कई बार विरोध-प्रदर्शन भी किया जा चुका है। राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात व मध्यप्रदेश में जनजाति समुदाय से लंबे समय से भील प्रदेश की मांग हो रही थी। चार राज्यों से करीब 42 जिलों काे शामिल कर मांग की जा रही थी। राजस्थान से 28 लाख, गुजरात में 34 लाख, महाराष्ट्र में 18 लाख और मध्यप्रदेश में 46 लाख की जनसंख्या है।

खास तौर पर कहां-कहां से मांग : राजस्थान में भी डूंगरपुर, बांसवाड़ा,उदयपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, राजसमंद, चितौड़गढ़, जालोर, बाड़मेर, पाली से मांग की जा रही है।

क्या ब्लास्ट का कारण माइंस का विरोध?

उदयपुर में काफी संख्या में माइंस है। कई बार माइंस काे लेकर विरोध हो चुके है। साथ ही माइंस होने के कारण दुकानों पर भी अवैध रूप से डेटोनेटर बेचे जाते हैं। माइंस से ब्लास्टिंग के जरिए पत्थर निकाले जाते हैं। ऐसे में पुलिस सूत्रों का मानना है कि दुकानों से भी डेटोनेटर लेकर विस्फोट किया जा सकता है।

क्या ये किसी की शरारत थी?

रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर का रैपर व बारूद भी पड़ा हुआ मिला था। वहां पर किसी तरह का टाइमर व अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण नहीं मिले हैं। पुलिस का कहना है कि हो सकता है कि किसी ने शरारत करने के लिए डेटोनेटर से ब्लास्ट कर दिया हो।

एक चौंकाने वाला सच ये भी…

ई-कॉमर्स वेबसाइट पर मिल रहा बम ब्लास्ट का सामान

मामले की इन्वेस्टिगेशन के दौरान चौंकाने वाला सच भास्कर टीम के सामने आया। इंटरनेट पर ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बम बनाने का सामान ऑनलाइन मिल रहा है। कई ई-कॉमर्स वेबसाइट ऑनलाइन ऑर्डर पर होम डिलीवरी कर देती है।

इसके लिए पहले ही फोन कर अकाउंट में रुपए जमा करवाने पड़ते हैं। सुपर 90 डेटोनेटर सहित बम ब्लास्ट का पूरा सामान मिल जाता है। सरकार ने पोर्न फिल्म दिखाने वाली वेबसाइट को बैन कर दिया है, लेकिन बम ब्लास्ट का सामान ऑनलाइन आराम से मिल रहा है।

सोमवार को दिनभर जांच में जुटी रहीं टीमें

दिल्ली से NSG की टीम के तीन अधिकारी सोमवार सुबह करीब 10 बजे रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। ट्रैक के आसपास टीम ने छानबीन की। कुछ अहम सबूत भी जुटाए हैं। करीब डेढ़ घंटे तक वहां के गांवों में भी टीम ने पहुंच कर पूछताछ की। ब्लास्ट को लेकर NSG, NIA, IB की अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं। टीमों को किसी तरह का टाइमर, इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद नहीं मिला है। किसी तरह का सीसीटीवी फुटेज भी नहीं मिला है।

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उदयपुर रेलवे ब्रिज पर हुए विस्फोट की जांच ATS-SOG को दी गई है। सीएम अशोक गहलोत ने सोमवार शाम को हाईलेवल मीटिंग करके पूरे मामले का रिव्यू किया। फिर राजस्थान एटीएस व एसओजी से जांच कराने का फैसला किया गया। ATS के ADG अशोक राठौड़ की अगुवाई में टीम आज घटनास्थल पर जाकर जांच शुरू करेगी। (पूरी खबर पढ़ें)

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