एक लाख मेडिकल छात्रों को दिया जाएगा प्रशिक्षण: संकट में फंसे व हादसे का शिकार होने वालों का जीवन बचाने की मुहिम



जयपुर7 मिनट पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी

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आरयूएचएस में विश्वस्तरीय ‘बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग सेन्टर व स्किल लैब’ खोलने की तैयारी।

अगर किसी हादसे में घायल हो जाए या चलते-चलते सड़क पर बेहोश होकर गिर जाने पर किसी भी व्यक्ति का पहला कर्तव्य उसकी जान बचाना होना चाहिए। लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) का प्रशिक्षण अनिवार्य है। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने मेडिकल, डेंटल, फार्मेसी, नर्सिंग, फिजियोथैरेपी और पैरामेडिकल के एक लाख विद्यार्थियों को बीएलएस का पाठ पढ़ाने की मुहिम के लिए यहां पर विश्व स्तरीय बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग सेन्टर और स्किल लैब खोलने की तैयारी कर ली है।

जिससे आरयूएचएस से जुड़े संस्थानों की फैकल्टी को भी लोगों के जीवन को बचाने के गुर सिखाएं जाएंगे। सेन्टर खोलने के लिए चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग और आरयूएचएस प्रशासन से गहन मंथन के बाद निर्णय लिया गया है। बैठक में चिकित्सा सचिव डॉ.पृथ्वी, परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के कमिश्नर के.एल.स्वामी, एडीजी (ट्रेफिक) वी.के.सिंह, आरयूएचएस कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्राचार्य डॉ.विनोद जोशी, अतिरिक्त प्राचार्य डॉ.तरुणलाल समेत अनेक अधिकारी मौजूद थे।

शोध कर रिपोर्ट जारी करेगा
परिवहन, ट्रेफिक, पुलिस विभाग और जेडीए मिलकर सड़क हादसों को रोकने, ब्लैक स्पॉट, सड़क दुर्घटना होने वाले हाइवे जैसे विषयों पर शोध कर रिपोर्ट जारी करना प्रस्तावित है। जिसमें जाने-माने विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। मौजूदा स्थिति में प्रदेश में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में ट्रेनिंग सेन्टर संचालित है। जयपुर के प्रताप नगर स्थित अारयूएचएस में दूसरा सेन्टर होगा। सरकार ने बीकानेर, जोधपुर अौर कोटा में बीएलएस सेन्टर खोलने की अनुमति दे दी है।

‘मैनीकिन’ के जरिए मिलेगी ट्रेनिंग
विशेषज्ञ डॉ. एलएन पांडे के मैनीकिन (डमी) के जरिए ट्रेनिंग दी जाती है। बीएलएस ऐसी चिकित्सा सहायता है, जो लोगों को अस्पताल पहुंचने से पहले या उन स्थितियों में दी जाती है, जहां तुरन्त सुविधा नहीं मिलती। घायल को सीधा लिटाया जाता है। नब्ज के साथ गर्दन की नाड़ी, नाक पर हाथ लगाकर सांसें चल रही है या नहीं। इसके बाद उसकी छाती खत्म होने व पेट शुरू होने वाली जगह पर एक हाथ की हथेली पर दूसरे हाथ को रख कर उसे दबाते है। एक मिनट में 100 से 120 बार करना है। बाद में अस्पताल पहुंचाया जाता है।

आरयूएचएस में विश्व स्तरीय बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग सेन्टर व स्किल लैब खोलने की तैयारी कर ली है। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग समेत अन्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है। सिर्फ सरकार की हरी झंडी का इंतजार है। जगह भी चिंहित कर ली है। -डॉ. सुधीर भंडारी, कुलपति, आरयूएचएस

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