आरोपियों को गिरफ्तार करने को लेकर धरना प्रदर्शन: बोले- पुलिस आरोपियों को बचा रही है, आनन-फानन में पेश किया चालान




बाड़मेर34 मिनट पहले

समाज के लोगों ने राज्यपाल के नाम का ज्ञापन एडीएम को दिया।

आरटीआई कार्यकर्ता सबलसिंह भाटी पर हुए हमले को लेकर शुक्रवार को बाड़मेर कलेक्ट्रेट के बाहर समाज के लोगों ने धरना देकर प्रदर्शन किया। पूरे मामले की जांच एसओजी से करवाने की मांग की है। ज्ञापन में बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन पर आरोप लगाए है। वहीं एसपी ने उचित कार्रवाई नहीं की इससे एसपी की भूमिका भी संदिग्ध है। एसपी को निलंबित करने और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।

दरअसल, 15 अक्टूबर को हरसाणी गांव से बाड़मेर शहर की तरफ आ रहे आरटीआई कार्यकर्ता सबलसिंह भाटी पर चार बदमाशों ने हमला हाथ-पैर तोड़ दिए थे। इसके कुछ दिन बाद पुलिस ने साजिशकर्ता सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरटीआई कार्यकर्ता व समाज के लोगों का कहना है कि पुलिस ने साजिशकर्ता व आरोपियों के साथ सांठ-गांठ कर बचाया जा रहा है। आरोप लगाया कि 15 दिन के भीतर गलत व दूषित जांच कर चालान पेश किया गया जो कानून के विरुद्ध है। शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट के बाहर समाज के लोगों ने एक दिवसीय धरना देकर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। राज्यपाल के नाम का ज्ञापन एडीएम अश्चिनी के पंवार को ज्ञापन दिया। प्रदर्शन के दौरान कोतवाली, सदर, रीको और नागाणा थाने पुलिस जाब्ता तैनात था।

आरटीआई कार्यकर्ता सबलसिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों को बचाने का काम कर रही है। आरोपियों को बापर्दा पेश करते है शिनाख्त करवाते। आने वाले दो-तीन माह में यह पकड़े गए सभी आरोपी बरी होंगे। मुख्य आरोपी खुले में घूम रहे है।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रविंद्रसिंह भाटी ने आरोप लगाया कि आरटीआई कार्यकर्ता सबलसिह के ऊपर हमले में कई न कई बड़े नाम शामिल है। प्रशासन भी उनके दबाव में काम भी नहीं कर पा रहा है। लीपापोती कर रहा है। पर्चा बयान के आधार पर पुलिस को 307 में मामला दर्ज होना चाहिए था लेकिन पुलिस ने दबाव में 308 में दर्ज किया गया। बाड़मेर में भाईयों को लड़ाने की राजनीति की जा रही है। स्तरहीन राजनीति हो रही है। सभी युवाओं से अपील है कि ऐसी गंदी राजनीति का हिस्सा नहीं बने। पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो चालान पेश किया व बिल्कुल फर्जी किया है। जानलेवा हमले में 308 मे मामला दर्ज किया और आरोपियों की शिनाख्त तक नहीं करवाई। पुलिस पर इतना दबाव है कि चार दिनों में भाड़े के लोगों को लाकर पेश किया है। आरोप लगाया कि प्रशासन व जनप्रतिनिधि दोनों ही मिले हुए है।

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